देहरादून: बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने और वहां के निवासियों को भूमि का मालिकाना हक दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत बुधवार को देहरादून के गांधी पार्क में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं और बिंदुखत्ता से आए ग्रामीणों के साथ धरने और उपवास पर बैठ गए हैं।
संयोगवश आज यानी 25 फरवरी को राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक भी चल रही है। गलियारों में चर्चा है कि कैबिनेट में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। पूर्व सीएम रावत ने इसी मौके पर सरकार को घेरते हुए स्पष्ट किया कि जब तक क्षेत्रवासियों को विधिसम्मत दर्जा और मालिकाना अधिकार सुनिश्चित नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
गांधी पार्क में धरने को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने सत्ताधारी दल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
"भाजपा ने राजस्व गांव के नाम पर केवल वोट मांगे हैं और बार-बार आश्वासन देकर जनता को गुमराह किया है।"
बिंदुखत्ता के लोग दशकों से अपनी ही जमीन पर मालिकाना हक के लिए तरस रहे हैं।
राजस्व ग्राम का दर्जा मिलना क्षेत्र के विकास और जनहित के लिए अनिवार्य है।
हरीश रावत के इस उपवास को समर्थन देने के लिए बिंदुखत्ता क्षेत्र से बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं देहरादून पहुंची हैं। धरने में पूर्व मंत्री हेमवती नंदन दुर्गापाल सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि आज की कैबिनेट बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।






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