हल्द्वानी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मंगलवार को हल्द्वानी दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने एक बयान में हरिद्वार की खानपुर विधानसभा सीट से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई।
हरीश रावत नें कहा उनका मन हरिद्वार जिले की खानपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा और पार्टी जहां से चुनाव लड़ने का निर्देश देगी, वह वहीं से चुनाव लड़ेंगे। परिवार के लोगों को टिकट दिए जाने के सवाल पर भी हरीश रावत ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के लोग पिछले 20 से 25 वर्षों से जनता के बीच रहकर मेहनत कर रहे हैं।
परिवारवाद के सवाल पर हरीश रावत ने कहा कि जो लोग उनके परिवार के लोगों की राजनीतिक सक्रियता को परिवारवाद से जोड़ते हैं, उन्हें इस बात को भी देखना चाहिए कि उनके परिवार के सदस्य लंबे समय से जनता के बीच काम कर रहे हैं। इसके साथ ही हरीश रावत ने यह भी कहा कि भाजपा को हराने के लिए जो भी मजबूत प्रत्याशी होगा, वह उसके साथ खड़े हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस बयान ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। हल्द्वानी पहुंचे हरीश रावत ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि उनका मन हरिद्वार की खानपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का है। हरीश रावत के मुताबिक, खानपुर क्षेत्र से जुड़े लोग उनसे चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं। यही वजह है कि उनके मन में खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा बनी है।
हालांकि, हरीश रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने को लेकर अंतिम निर्णय उनका नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व का होगा। पार्टी नेतृत्व जिस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहेगा, वह वहीं से चुनाव मैदान में उतरेंगे।
अब बड़ा सवाल यही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में हरीश रावत किस सीट से चुनाव मैदान में उतरते हैं? कांग्रेस उनके अनुभव का इस्तेमाल किस रणनीति के तहत करती है? फिलहाल हरीश रावत के खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा वाले बयान ने उत्तराखंड की सियासत में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। पार्टी नेतृत्व का फैसला अब इस पूरे मामले में सबसे अहम होगा।






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