ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: October 26, 2026 05:15 PM IST
राज्य

नार्को टेस्ट से पहले उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस ने सोमवार को अंकिता भंडारी हत्याकांड में उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी की टाइमिंग और कथित वीआईपी की जाँच पर गंभीर सवाल उठाए। प्रेस वार्ता को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष सुजाता पॉल और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने संबोधित किया।
सीबीआई जाँच शुरू होने के बाद उर्मिला सनावर से पूछताछ हुई और सीबीआई की टीम उनके सहारनपुर स्थित आवास पर पहुँची। 23 अक्टूबर को उर्मिला सनावर और पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए देहरादून कोर्ट में सहमति दी थी। अगली कानूनी प्रक्रिया 26 अक्टूबर को आगे बढ़नी थी, लेकिन 24 अक्टूबर की रात एक अलग शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ और 25 अक्टूबर को उर्मिला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सुुजाता पॉल ने सवाल उठाया कि जब उर्मिला नार्को टेस्ट के लिए सहमति दे चुकी थीं और कथित वीआईपी से जुड़े गंभीर आरोपों में बड़े नामों का उल्लेख कर रही थीं, तो ठीक अगली पेशी से पहले उनकी गिरफ्तारी क्यों हुई? क्या इस कार्रवाई से नार्को टेस्ट की प्रक्रिया प्रभावित या विलंबित होगी? पहले भी इसी विवाद से जुड़ी शिकायत और गैरकृजमानती वारंट की बात सामने आई थी। ऐसे में पुरानी और नई कार्रवाई के बीच अंतर तथा गिरफ्तारी के समय को लेकर पुलिस को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सुजाता पॉल ने कहा कि उर्मिला ने अपने बयानों में कथित वीआईपी दुष्यंत कुमार गौतम और उनके वरिष्ठ नेताओं से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की सत्यता जाँच का विषय है। सीबीआई को स्पष्ट करना चाहिए कि इन बयानों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जाँच कहाँ तक पहुँची है। क्या कथित वीआईपी को लेकर किसी तरह के दबाव या मामले में समझौता कराने की कोशिश हुई? यदि ऐसा कोई आरोप या साक्ष्य सामने आया है, तो उसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को दोषी मानने से पहले तथ्य सामने आना जरूरी है, लेकिन गंभीर सवालों को अनुत्तरित भी नहीं छोड़ा जा सकता।
महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि अंकिता भंडारी के माताकृपिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लगातार दरकृदर भटक रहे हैं। परिवार की पीड़ा और उत्तराखंड की जनता में इस मामले को लेकर व्याप्त आक्रोश का सम्मान करते हुए सरकार और जाँच एजेंसियों को पारदर्शी जवाब देना चाहिए। जब परिवार लंबे समय से कथित वीआईपी का नाम लेकर निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहा है, तो अब तक इस पहलू पर क्या प्रगति हुई है, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति और इस प्रकरण से जुड़े सवालों के बीच क्या किसी तरह का दबाव या समझौता कराने का प्रयास हुआ, इस बारे में भी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जाँच होनी चाहिए।

ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×