रुद्रपुर। कहते हैं कि खाकी के भीतर भी एक इंसान बसता है, जिसे भूख, प्यास और थकान महसूस होती है। ट्रांजिट कैंप कोतवाली में सोमवार को कुछ ऐसा ही मंजर दिखा, जहां अनुशासन और अधिकार की लड़ाई ने तीखी बहस का रूप ले लिया। मामला भाजपा विधायक शिव अरोड़ा के प्रतिनिधि सोनू वर्मा और एक महिला कांस्टेबल के बीच का था, जिसका वीडियो अब शहर के हर मोबाइल में चर्चा का विषय बना हुआ है।
तय कार्यक्रम के अनुसार थाने में पुलिसकर्मियों के सम्मान के लिए एक आयोजन होना था। इसी सिलसिले में विधायक के प्रतिनिधि सोनू वर्मा जब कोतवाल से मिलने पहुंचे, तो वे सीधे कक्ष की ओर बढ़ गए। गेट पर तैनात महिला कांस्टेबल ने उन्हें रोका और पूछताछ की। बस यही बात विवाद की चिंगारी बन गई। देखते ही देखते शब्दों के बाण चलने लगे और माहौल गरमा गया।
इस विवाद के पीछे की एक ऐसी कहानी भी है जो अक्सर फाइलों में दब जाती है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, संबंधित महिला कांस्टेबल पिछले 10 दिनों से एक लापता किशोरी को ढूंढने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही थीं। पूरी रात चली दबिश के बाद वह बच्ची को सकुशल बरामद कर थाने लौटी थीं। रात भर की जागृति और जिम्मेदारी के बोझ से थकी उन आंखों को शायद यह अंदाजा नहीं था कि सामने खड़ा व्यक्ति सत्ता के गलियारे से है। इसी थकावट और प्रोटोकॉल के पालन ने विवाद का रूप ले लिया।
जब मामला बढ़ा और वीडियो वायरल हुआ, तो खुद विधायक शिव अरोड़ा ने कमान संभाली। उन्होंने किसी भी तरह की गुटबाजी को हवा देने के बजाय सीधे थाने पहुंचकर स्थिति को समझा। विधायक ने कहा, "यह केवल एक गलतफहमी थी। पुलिस और जनता के बीच संवाद सम्मानजनक होना चाहिए।" खेद के साथ हुआ विवाद का पटाक्षेप हंगामे के बाद थाने में ही 'पंचायती' हुई। अधिकारियों की मौजूदगी में महिला कांस्टेबल ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए खेद प्रकट किया, जिसके बाद विधायक प्रतिनिधि ने भी मामले को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया। बिना किसी लिखित शिकायत के इस कड़वाहट को संवाद के जरिए खत्म कर दिया गया।






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