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  • Written By: Admin
  • Published: February 22, 2026 10:07 PM IST
  • Updated: February 22, 2026 10:08 PM IST
उत्तराखंड

खुदी सड़कों ने ली दो जानें: हल्द्वानी में बुजुर्ग की ट्रक से कुचलकर मौत, उधम सिंह नगर में भी दर्दनाक हादसा

हल्द्वानी/उधम सिंह नगर। शहर में विकास कार्यों के नाम पर जगह-जगह खोदी गई सड़कें अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। गड्ढों से छलनी सड़कों पर रोज हादसे हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मानो आंखें मूंदे बैठा है। रविवार को ऐसी ही लापरवाही ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं।

हल्द्वानी में बुजुर्ग की दर्दनाक मौत

पनचक्की रोड स्थित अंबिका विहार के पास दोपहर एक दर्दनाक हादसा हुआ। 70 वर्षीय सुरेश चंद्र पांडे ट्रक की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सड़क पर सीवर लाइन डालने के लिए गहरे गड्ढे खोदे गए थे, जिससे रास्ता संकरा हो गया था और यातायात बाधित था।

रानीबाग से एक अंत्येष्टि में शामिल होकर स्कूटी से शांति नगर लौट रहे पांडे जब पास लेने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनकी स्कूटी भारी ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि सिर पर हेलमेट होने के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। कार्यदायी संस्था USDDA पर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय पार्षद मुकुल बल्यूटिया ने कहा कि पिछले दो महीनों से सीवर लाइन के नाम पर बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद उन्हें भरा नहीं गया। उन्होंने सीधे तौर पर विभाग को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया।

उधम सिंह नगर में भी ट्रक से कुचलकर मौत

इसी दिन उधम सिंह नगर जिले से भी एक दर्दनाक हादसे की खबर आई। शक्तिफार्म ठाकुर नगर, रुद्रपुर क्षेत्र में सड़क पार कर रहे 55 वर्षीय सुशांत गाइन को पीछे से आ रहे ट्रक ने कुचल दिया। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार, सुशांत रोज की तरह सुबह काम पर निकले थे। सिरसा मोड़ पर रोड क्रॉस करते समय तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

दोनों घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या विकास की कीमत लोगों की जान से चुकाई जाएगी? आखिर कब तक अधूरे और असुरक्षित कार्य आम नागरिकों की जिंदगी पर भारी पड़ते रहेंगे?

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