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  • Written By: Admin
  • Published: June 17, 2026 03:50 PM IST
राज्य

ठहराव लेकर आगे बढ़ रहा मानसून,18 जून से नया पश्चिमी विक्षोभ लायेगा कुछ बदलाव

देहरादून। प्री मानसून गतिविधि सक्रिय होने से प्रदेश के ऊंचाई वाले जिलों में रुक-रुककर वर्षा होने का दौर जारी है। यद्यपि निचले व तराई वाले क्षेत्रों में वर्षा अभी जोर नहीं पकड़ पाई है। मौसम विज्ञान केन्द्र के अनुसार अगले दो-तीन दिन बागेश्वर, पिथौरागढ़ समेत गढ़वाल के ऊंचाई वाले जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मैदानी क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहेगा। 18 जून से नया पश्चिमी विक्षोभ कुछ बदलाव लेकर आएगा।
शुरुआत में लगभग सामान्य समय से चला दक्षिण पश्चिम मानसून ठहराव लेते हुए आगे बढ़ रहा है। कई जगह यह लंबा ब्रेक ले रहा है। इस कारण प्रदेश में मानसून पहुंचने में कुछ दिन की देरी हो सकती है। मानसून के उत्तराखंड पहुंचने का सामान्य समय 20 जून है।
अंडमान निकोबार में मानसून सामान्य से छह दिन पहले सक्रिय हो चुका था। यद्यपि केरल तट पर यह चार जून (तीन दिन देरी से) को पहुंचा। अरब सागर शाखा ने गति पकड़ी और यह कर्नाटक व महाराष्ट्र के निचले हिस्से तक पांच से सात जून के आसपास तय समय पर पहुंच गया। यह शाखा आठ जून से ऊपर नहीं बढ़ी है। बंगाल की खाड़ी वाली दूसरी शाखा ने चार-पांच दिन की देरी से 10 जून को मणिपुर समेत अन्य पूर्वी प्रदेशों को कवर किया।
11 व 12 जून को कुछ आगे बढ़ने के बाद यह शाखा ठहर गई। यद्यपि 15 जून को कुछ प्रगति के साथ समूचे आंध्र प्रदेश, बंगाल को कवर करते हुए ओडिशा, झारखंड, बिहार के कुछ अन्य हिस्सों में आगे बढ़ा है।मानसून को झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार को पार करने के बाद निचले मध्य प्रदेश व पूर्वी उत्तर प्रदेश होते हुए उत्तराखंड पहुंचना होता है। मानसूनी वर्षा खेती, भूजल स्तर बढ़ाने, गर्मी से राहत तीनों दृष्टिकोण से मददगार है।स्काईमेट के मौसम विज्ञानी महेश पलावत के अनुसार पश्चिमी तट पर मानसून कमजोर हुआ है। मानसून को पूर्वी दिशा में आगे बढ़ने के लिए बंगाल की खाड़ी पर कम दबाव का क्षेत्र नहीं बन पा रहा। कम दबाव बनने से होने वाली मौसमी गतिविधियों से मानसून उत्तर पश्चिमी दिशा की तरफ बढ़ता है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून कमजोर होने के पीछे ऊपरी वायुमंडल में चल रही हवाओं का असामान्य पैटर्न है। पश्चिमी जेट स्ट्रीम सामान्य से ज्यादा दक्षिण की ओर खिसक गई है, इससे मानसून को आगे बढ़ाने वाली हवाएं प्रभावित हो रही हैं। इस कारण अरब सागर व बंगाल की खाड़ी में पर्याप्त नमी के बावजूद बादल नहीं बन पा रहे।

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