रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर अब देश के सबसे आधुनिक केंद्रों में शुमार होने की राह पर है। गुरुवार को प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सेंटर में 10 नए बाड़ों का उद्घाटन किया। इस विस्तार के बाद यहाँ बाड़ों की कुल संख्या 20 से बढ़कर 30 हो गई है, जिससे रेस्क्यू किए गए बाघों और गुलदारों को अधिक सुरक्षित और तनावमुक्त वातावरण मिल सकेगा।
वन मंत्री ने बताया कि वर्तमान में यहाँ 13 लेपर्ड (गुलदार) और 12 टाइगर (बाघ) रखे गए हैं। पहले जगह की कमी के कारण इन वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष का खतरा बना रहता था, लेकिन अब बाड़ों की संख्या बढ़ने से उन्हें अलग-अलग और उनके स्वभाव के अनुकूल माहौल में रखा जा सकेगा।
समारोह के दौरान वन मंत्री ने एक अत्याधुनिक लैब का भी शुभारंभ किया।
लाभ: अब वन्यजीवों के सैंपल परीक्षण, डीएनए टेस्ट और स्वास्थ्य जांच के लिए बाहरी लैब पर निर्भर नहीं रहना होगा।
त्वरित उपचार: आधुनिक उपकरणों से लैस इस लैब के जरिए घायल या बीमार वन्यजीवों का इलाज और निगरानी अब पहले से कहीं अधिक तेज और प्रभावी होगी।
जंगलों की आग (वनाग्नि) को लेकर सुबोध उनियाल ने सरकार की नई रणनीति साझा की। उन्होंने कहा कि वनाग्नि नियंत्रण अब केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि जन-भागीदारी की जिम्मेदारी है।
फॉरेस्ट फायर कमेटियां: संवेदनशील क्षेत्रों में ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में कमेटियों का गठन किया गया है।
आर्थिक मदद: प्रत्येक कमेटी को 30 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है।
आधुनिक उपकरण: कर्मचारियों को फायर प्रूफ जैकेट, बूट, ब्रश कटर और वुड कटर जैसे उपकरणों से लैस किया गया है।
उपलब्धि: तकनीक और त्वरित रिस्पांस के कारण पिछले 4 वर्षों में वनाग्नि की घटनाओं में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर विधायक दीवान सिंह बिष्ट, कॉर्बेट डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला, डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा, पार्क वार्डन बिन्दर पाल, तराई पश्चिम के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य, रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ ध्रुव मर्तोलिया, एसडीओ संदीप गिरी और वन्यजीव चिकित्सक डॉ. दुष्यंत कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।






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