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  • Written By: Admin
  • Published: January 29, 2026 04:22 PM IST
  • Updated: January 29, 2026 04:23 PM IST
उत्तराखंड

CLUCC ठगी: निवेशकों के लिए एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल जल्द

 एलयूसीसी चिटफंड घोटाले में ठगी का शिकार हुए लाखों निवेशकों को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। पीड़ितों की शिकायतों और दावों के लिए राज्य सरकार एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेगी, जिस पर निवेशक अपनी पूरी जानकारी, शिकायत और मुआवजे से संबंधित दावे दर्ज करा सकेंगे। इस मामले की जांच वर्तमान में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है।

सीबीआई ने 14 जनवरी को शासन को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि इतने बड़े स्तर पर ठगी के मामलों में पीड़ितों से संपर्क और डेटा संकलन के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच अत्यंत आवश्यक है। इसके क्रम में सचिव दिलीप जावलकर ने सहकारिता विभाग को आवश्यक अग्रिम कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शासन स्तर पर पोर्टल के तकनीकी ढांचे और संचालन को लेकर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। गौरतलब है कि एलयूसीसी कंपनी ने प्रदेश के कई जिलों में अपनी शाखाएं खोलकर सैकड़ों एजेंट नियुक्त किए थे।

इन एजेंटों के माध्यम से आम लोगों को आरडी और एफडी जैसी छोटी बचत योजनाओं का लालच देकर निवेश कराया गया। जून 2024 में अचानक कंपनी के कार्यालय बंद होने लगे, जिससे निवेशकों को ठगी का अहसास हुआ। लोगों ने एजेंटों से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद पौड़ी जिले की कोटद्वार कोतवाली में एक महिला की शिकायत पर पहला मुकदमा दर्ज हुआ। धीरे-धीरे यह संख्या बढ़कर विभिन्न जिलों में कुल 18 एफआईआर तक पहुंच गई। प्रारंभिक जांच के बाद मामला सीआईडी को सौंपा गया, जिसने न्यायालय में आरोपपत्र भी दाखिल किया।

इस बीच एक व्यक्ति द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए। सीबीआई ने 27 नवंबर को देहरादून शाखा में एफआईआर दर्ज कर कोटद्वार की एफआईआर को आधार बनाते हुए शेष 17 मामलों को इसमें शामिल कर लिया। सीबीआई की अब तक की जांच में सामने आया है कि एलयूसीसी कंपनी ने करीब 1.5 लाख निवेशकों से निवेश के नाम पर ठगी की है। ठगी की कुल राशि लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इसी को देखते हुए जांच एजेंसी ने शासन से आग्रह किया है कि पीड़ितों के लिए एक साझा और पारदर्शी मंच बनाया जाए। शासन का कहना है कि एकीकृत पोर्टल के माध्यम से न केवल शिकायतें दर्ज होंगी, बल्कि आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित राहत से संबंधित जानकारी भी निवेशकों तक पहुंचाई जाएगी। जल्द ही पोर्टल की आधिकारिक शुरुआत किए जाने की संभावना है।

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