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  • Written By: Admin
  • Published: February 18, 2026 04:06 PM IST
  • Updated: February 18, 2026 04:09 PM IST
उत्तराखंड

मौत के सौदागरों पर एसटीएफ की 'सर्जिकल स्ट्राइक': ब्रांडेड रैपर में बिक रहा था जहर; 3 और गिरफ्तार, अब तक 16 पहुंचे सलाखों के पीछे!

देहरादून/रुड़की। बीमार को ठीक करने वाली दवा अगर मौत का कारण बन जाए, तो इससे बड़ा जघन्य अपराध कुछ नहीं हो सकता। उत्तराखंड एसटीएफ ने ऐसे ही एक खतरनाक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है जो ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं बाजार में खपा रहा था। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के नेतृत्व में टीम ने रुड़की और देवबंद में छापेमारी कर तीन और आरोपियों को दबोच लिया है।

क्विंटलों में मिला 'जहर' बनाने का कच्चा माल एसटीएफ की इस कार्रवाई ने ड्रग माफियाओं की कमर तोड़ दी है। छापेमारी के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। टीम ने 263 किग्रा नकली पैरासिटामोल पाउडर और 2490 किग्रा जिंक पाउडर बरामद किया है। इतना ही नहीं, हजारों की संख्या में Oxalgin-DP जैसी प्रतिबंधित और नकली गोलियां भी मिली हैं। जब राजकीय लैब में इन दवाओं की जांच कराई गई, तो रिपोर्ट ने सबके होश उड़ा दिए—ये दवाएं पूरी तरह से नकली थीं।

नामचीन कंपनियों के रैपर और QR कोड का सहारा गिरफ्तार आरोपी नरेश धीमान, लोकेश गुलाटी और मोहतरम अली इतने शातिर थे कि वे मास्टरमाइंड नवीन बंसल के साथ मिलकर नामी कंपनियों के हूबहू दिखने वाले रैपर और आउटर बॉक्स तैयार करते थे। आम आदमी के लिए असली और नकली में फर्क करना नामुमकिन था। आरोपी लोकेश गुलाटी का तो पुराना आपराधिक इतिहास भी है; वह पहले भी हरिद्वार के गंगनहर थाने में इसी तरह के जुर्म में जेल जा चुका है।

रडार पर अब मेडिकल स्टोर और सप्लायर्स एसएसपी अजय सिंह ने साफ कर दिया है कि यह अभियान अभी थमा नहीं है। एसटीएफ अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिन्होंने इन दवाओं को मेडिकल स्टोरों तक पहुँचाया। उन सप्लायर्स की सूची तैयार की जा रही है जो इस मौत के व्यापार में साझीदार थे।

दवाओं की खरीदारी करते समय पैकेजिंग और क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर जरूर जांचें। संदेह होने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करें, क्योंकि आपकी एक सतर्कता किसी की जान बचा सकती है।

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