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  • Written By: Admin
  • Published: September 17, 2026 05:34 PM IST
राज्य

कांग्रेस ने फिर केन्द्र सरकार की अग्निवीर योजना पर हमला बोला

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस ने एक बार फिर से अग्निवीर योजना को लेकर मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने केंद्र सरकार पर हमला बोला।
उत्तराखंड कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा अत्यंत गौरवशाली रही है। राज्य के पर्वतीय जिलों के हजारों परिवार सेना में रोजगार को पी  गए। वहीं, हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड एक सैन्य बाहुल्य प्रदेश है। यहां हर घर में एक सैनिक है। जब यहां कोई शहीद होता है तो उसके माता-पिता गौरवान्वित महसूस करते हैं। यह योजना देश और प्रदेश के युवाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि 4 साल की सेवा पूरी करने के बाद वापस आने वाले अग्निवीरों के रोजगार को लेकर सरकार की क्या योजना है। कई पिढ़ियों से अपनी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते आ रहे हैं। उन्होंने कहा युवाओं को पक्की नौकरी चाहिए, 4 साल का इंतजार नहीं चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देवभूमि और वीर भूमि के नाम से जाने जाने वाले उत्तराखंड के युवाओं के मन में देश सेवा का जज्बा रहता है, लेकिन केंद्र सरकार की इस अल्पकालिक योजना ने उनके स्थायी भविष्य और सपनों को चकनाचूर किया है। कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता पार्टी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेस नेताओं ने ये भी आरोप लगाए कि 4 साल की इस योजना ने सेना की युद्ध क्षमता और मनोबल को भी कमजोर किया है। कांग्रेस ने अग्निपथ योजना को देश के लिए घातक बताया है। कांग्रेस का कहना है कि अग्निवीरों को रेगुलर किया जाना चाहिए.बता दें इसके साथ ही कांग्रेस ने पीएम मोदी के जन्मदिवस पर दीप जलाने की अपील पर सवाल खड़े किए। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने कहा कि आज जब देश भर में कई परिवारों के सामने दो वक्त के भोजन की चुनौती है, ऐसे वक्त में तेल के दीए जलाने की बजाय जरूरतमंदों की मदद पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं में अधिक से अधिक तेल के दीए जलाने की होड़ की जगह उन परिवारों की चिंता होनी चाहिए थी जिनके घरों पर शाम का चूल्हा भी बड़ी मुश्किल से जलता है।

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