देहरादून। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक का एआई ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अपनी मौजूदा तस्वीरें एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर उन्हें 1980 के दशक के लुक में बदल रहे हैं। एआई के जरिए तस्वीर में उस दौर के कपड़े, हेयर स्टाइल, चश्मा, बैकग्राउंड और पुराने जमाने का माहौल जोड़ा जा रहा है। आम लोगों के साथ अभिनेता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी इस ट्रेंड का हिस्सा बन रहे हैं। हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी एआई प्लेटफॉर्म पर निजी तस्वीर अपलोड करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। अनजान प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई तस्वीर के इस्तेमाल, स्टोरेज और प्राइवेसी से जुड़े नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। 80 के दशक एआई ट्रेंड का क्रेज सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ रहा है। लोग अपनी मौजूदा तस्वीरों को एआई की मदद से 1980 के दशक के अंदाज में बदलकर शेयर कर रहे हैं। तस्वीरों में पुराने जमाने के कपड़े, हेयरस्टाइल और बैकग्राउंड जोड़कर उन्हें विंटेज लुक दिया जा रहा है।किसी भी एआई ऐप या वेबसाइट पर फोटो अपलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और प्राइवेसी पॉलिसी जरूर जांचें। यह भी देखें कि प्लेटफॉर्म आपकी फोटो को कितने समय तक स्टोर करता है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से कर सकता है।
ऐसी तस्वीरें एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से बचें, जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर, पता या बैंकिंग से जुड़ी कोई जानकारी दिखाई दे रही हो। खास तौर पर ऐसी निजी तस्वीरों को सार्वजनिक या अनजान प्लेटफॉर्म पर साझा करने से बचना चाहिए, जिनका इस्तेमाल आपकी पहचान से जुड़े डिजिटल सिस्टम में किया जाता है। किसी व्यक्ति की तस्वीर का गलत इस्तेमाल कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, एडिटेड फोटो या डीपफेक जैसी सामग्री तैयार की जा सकती है। एआई तकनीक ने तस्वीरों में बदलाव करना आसान बना दिया है। इसलिए किसी ट्रेंड में शामिल होने से पहले यह समझना जरूरी है कि तस्वीर किस प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जा रही है और उसके साथ प्लेटफॉर्म की शर्तें क्या हैं।






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