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  • Written By: Admin
  • Published: March 02, 2026 06:42 PM IST
  • Updated: March 02, 2026 06:44 PM IST
उत्तराखंड

अधिकारी से मारपीट की घटना की आड़ में नई SOP लागू करना चिंताजनक: पीसी तिवारी

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लागू की गई नई एसओपी (SOP) पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि और उसके समर्थकों द्वारा बेसिक शिक्षा निदेशक के साथ मारपीट की घटना अत्यंत निंदनीय और आपराधिक है तथा दोषियों पर तत्काल और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। यदि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होती तो भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि स्वयं को कानून से ऊपर समझने का साहस नहीं कर पाता।
उपपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस घटना की आड़ में प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई नई SOP गहरी चिंता का विषय बन गई है। उनके अनुसार अब शासन-प्रशासन से लेकर विकासखंड स्तर तक अधिकारियों से मिलने के लिए आम नागरिकों पर अत्यधिक औपचारिकताएँ थोप दी गई हैं। इनमें ऑनलाइन पंजीकरण, पहचान पत्र सत्यापन, मिलने का उद्देश्य पहले से बताना, रजिस्टर में विस्तृत विवरण दर्ज करना, सीमित संख्या में प्रवेश और पूर्व अनुमति की अनिवार्यता जैसे प्रावधान शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारियों से मिलने की संख्या व प्रक्रिया तय करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
पीसी तिवारी ने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में “लोक” सर्वोपरि है या “तंत्र”? उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक रूप से प्रशासन जनता का सेवक है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियाँ इसके उलट संकेत देती हैं। जिलाधिकारी कार्यालयों में साइलेंट जोन, विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति की अनिवार्यता और अब अधिकारियों से मिलने पर कठोर नियंत्रण—ये सभी कदम भय और अविश्वास का वातावरण बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अधिकारी पर हमला निश्चित रूप से गंभीर अपराध है, लेकिन उस अपराध की आड़ में पूरे समाज की आवाज को सीमित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। जन आंदोलनों से बने उत्तराखंड राज्य में यदि नागरिकों को अपनी बात रखने के लिए ही कई प्रतिबंधों से गुजरना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक भावना का अपमान है।
उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों से बेरोजगार युवा, भ्रष्टाचार से पीड़ित नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम जनता—सभी प्रभावित होंगे।

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