तीन दोषियों को सजा, फिर भी कथित वीआईपी पर सवाल
नई दिल्ली/देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान का सवाल फिर सुर्खियों में है। उत्तराखंड क्रांति दल डेमोक्रेटिक के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आशुतोष नेगी ने दिल्ली स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो मुख्यालय में करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान अपने बयान दर्ज कराए। अंकिता प्रकरण में कथित वीआईपी का नाम स्पष्ट करने की मांग के बीच इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जांच के उन सवालों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिनके जवाब का इंतजार प्रदेश को है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कानूनी कार्रवाई के बावजूद कथित वीआईपी की पहचान को लेकर सार्वजनिक बहस थमी नहीं है। आखिर वह कौन था, जिसकी चर्चा इस मामले में लगातार होती रही? क्या जांच में सामने आए सभी तथ्यों का पूरी तरह खुलासा हुआ है? और क्या उन सवालों के जवाब मिल पाएंगे, जिन्हें लेकर अंकिता को न्याय दिलाने की मांग उठती रही है?
आशुतोष नेगी लंबे समय से इस प्रकरण में कथित वीआईपी का नाम स्पष्ट करने की मांग करते रहे हैं। दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय में पांच घंटे तक पूछताछ और बयान दर्ज होने के बाद अब निगाहें जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर हैं। हालांकि, पूछताछ के दौरान नेगी ने कौन-से तथ्य या साक्ष्य प्रस्तुत किए और सीबीआई ने उनसे किन बिंदुओं पर सवाल किए, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
अंकिता हत्याकांड उत्तराखंड की संवेदनाओं से जुड़ा मामला है। ऐसे में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर उठते सवालों का जवाब केवल अटकलों से नहीं, बल्कि जांच के प्रमाणित तथ्यों और आधिकारिक निष्कर्षों से मिलना चाहिए। किसी व्यक्ति का नाम बिना प्रमाण सामने रखना न्याय और जांच दोनों के लिहाज से उचित नहीं होगा।
अब सवाल सीधा है कि क्या सीबीआई की जांच कथित वीआईपी को लेकर बने संशय पर निर्णायक स्थिति स्पष्ट करेगी? पांच घंटे की पूछताछ के बाद आशुतोष नेगी के बयान जांच का हिस्सा बन चुके हैं। अब देखना होगा कि इन बयानों से जांच को क्या दिशा मिलती है और अंकिता प्रकरण के अनुत्तरित सवालों पर कब तक स्थिति साफ होती है।






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