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  • Written By: Admin
  • Published: February 27, 2026 06:25 PM IST
  • Updated: February 27, 2026 06:26 PM IST
उत्तराखंड

विधि विश्वविद्यालय की जमीन से 'खेला' बर्दाश्त नहीं! यशपाल आर्य ने सरकार को घेरा, कहा- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है यह

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों रानीपोखरी (डोईवाला) के लिस्ट्राबाद की वह जमीन चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जिसे कभी विधि विश्वविद्यालय (Law University) के लिए समर्पित किया गया था। आरोप है कि सरकार इस भूमि के मूल स्वरूप को बदलने की कोशिश कर रही है, जिसके विरोध में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।

यशपाल आर्य की हुंकार: विधानसभा में गूंजेगा मुद्दा

धरना स्थल पर पहुँचे नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2016 में जिस उद्देश्य से इस भूमि का आवंटन हुआ था, उससे छेड़छाड़ करना न केवल डोईवाला बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के साथ अन्याय है।

"लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। अगर सरकार शिक्षा के लिए आरक्षित भूमि को अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव लाती है, तो यह प्रदेश की बौद्धिक प्रगति पर प्रहार है। हम इस लड़ाई को सड़क से लेकर विधानसभा के भीतर तक मजबूती से लड़ेंगे।"

आंदोलन की मुख्य मांगें:

जनप्रतिनिधियों और प्रधान संगठन ने नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन सौंपते हुए निम्नलिखित मांगें रखीं:

  • यथास्थिति बनाए रखें: 2016 में आवंटित भूमि को केवल विधि विश्वविद्यालय के लिए ही सुरक्षित रखा जाए।

  • प्रक्रिया पर रोक: भूमि उपयोग परिवर्तन के सभी प्रस्तावों को तत्काल रद्द किया जाए।

  • समयबद्ध योजना: विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए स्पष्ट 'टाइमलाइन' घोषित की जाए।

कांग्रेस का अल्टीमेटम: "झुकेंगे नहीं, पीछे हटेंगे नहीं"

परवादून जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहित उनियाल और ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने सीधे शब्दों में सरकार को चेताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे पवित्र मुद्दे को नजरअंदाज करना भारी पड़ेगा। यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो क्षेत्र की जनता एक व्यापक जनआंदोलन के लिए मजबूर होगी।

इस मौके पर ग्राम प्रधान संगठन, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और स्थानीय युवाओं की भारी उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी के हक की लड़ाई बन चुका है।

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