सांसद और भाजपा राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष डॉ. नरेश बंसल ने राज्यसभा में वंदे मातरम पर विशेष चर्चा में भाग लिया। डॉ. बंसल ने सदन में कहा कि वंदे मातरम भारत की आत्मा है और यह राष्ट्र चेतना का मंत्र है। उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अपने बलिदान से इस गीत को राष्ट्रीय जागरण का प्रतीक बनाया।
डॉ. बंसल ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और मातृभूमि की अराधना का प्रतीक है। उन्होंने सदन में अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि यह गीत राष्ट्र के गौरव, स्वतंत्रता के संघर्ष और भारत माता के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।
उन्होंने वंदे मातरम के इतिहास पर भी प्रकाश डाला:
यह गीत 1875 में लिखा गया और 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया।
1882 में आनंदमठ में इसका स्थान हुआ और 1905 के बंग-बंग आंदोलन के दौरान यह राष्ट्रीय जागरण का प्रमुख प्रतीक बना।
डॉ. बंसल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 1975 में स्वर्ण जयंती के अवसर पर आपातकाल के समय भी उन्होंने वंदे मातरम के माध्यम से तानाशाही के खिलाफ विरोध किया और देशभक्ति का संदेश फैलाया।
उन्होंने सदन में यह संदेश भी दिया कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि भारत माता की अराधना, स्वतंत्रता और राष्ट्र चेतना का अमर मंत्र है, जिसे हर भारतीय को गर्व से अपनाना चाहिए।






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