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  • Written By: Admin
  • Published: July 17, 2026 04:45 PM IST
राज्य

राहुल गांधी के दौरे से कांग्रेस में भारी उत्साह,छात्रों की गूंज से कांग्रेस देगी राजनीतिक संदेश

युवाओं के मुद्दों पर सीधे मैदान में उतरेगा विपक्ष

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 भले अभी कुछ समय दूर हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा कांग्रेस के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगठन में नई ऊर्जा भरने वाला अवसर बन गया है। लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिला कि प्रदेश कांग्रेस का लगभग पूरा संगठन एक ही मंच पर सक्रिय और उत्साहित दिख रहा है। राहुल गांधी के देहरादून आगमन और छात्रों की गूंज कार्यक्रम ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा कर दिया है। कांग्रेस भले इस कार्यक्रम को छात्रों के मुद्दों पर संवाद बता रही हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके जरिए पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आगामी चुनाव में बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा और युवाओं के भविष्य को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।
उत्तराखंड में लंबे समय से बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर असंतोष रहा है। कांग्रेस इन्हीं मुद्दों को सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी के दौरे का सबसे बड़ा असर संगठनात्मक स्तर पर देखने को मिलेगा। पिछले कुछ समय से गुटबाजी और निष्क्रियता के आरोप झेल रही प्रदेश कांग्रेस में इस कार्यक्रम के बहाने नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ गई है। जिला इकाइयों से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक तैयारियों में जुटा दिखाई दिया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी से संगठन में मनोबल बढ़ा है और चुनावी तैयारियों को गति मिलेगी।
हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि किसी एक दौरे से संगठन की पुरानी चुनौतियां स्वतः समाप्त नहीं हो जातीं। कांग्रेस के सामने अभी भी बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, गुटीय मतभेदों को कम करना और एकजुट चुनावी रणनीति बनाना जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। राहुल गांधी के दौरे को भाजपा ने राजनीतिक कार्यक्रम करार देते हुए उस पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस युवाओं के मुद्दों का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस का रिकार्ड भी जनता के सामने है। यानी राहुल गांधी के दौरे ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह जितना बढ़ाया है, उतना ही भाजपा को भी अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज करने का अवसर दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड का चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्रियता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस इस बार चुनावी तैयारी आखिरी समय पर नहीं, बल्कि काफी पहले से शुरू करना चाहती है। यदि राहुल गांधी भविष्य में भी उत्तराखंड का नियमित दौरा करते हैं और पार्टी युवाओं, महिलाओं, किसानों तथा पलायन जैसे स्थानीय मुद्दों पर लगातार अभियान चलाती है, तो कांग्रेस को संगठनात्मक लाभ मिल सकता है।
राहुल गांधी के दौरे ने कांग्रेस में उत्साह का संचार जरूर किया है, लेकिन चुनाव केवल उत्साह से नहीं जीते जाते। उत्साह को संगठन में, संगठन को जनसमर्थन में और जनसमर्थन को वोट में बदलना सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा होती है। उत्तराखंड की राजनीति में यह अक्सर देखा गया है कि बड़े नेताओं की सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ हमेशा चुनावी परिणामों में नहीं बदलती। इसलिए कांग्रेस के लिए यह दौरा शुरुआत तो माना जा सकता है, लेकिन मंजिल नहीं।
राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा कांग्रेस के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त और संगठनात्मक ऊर्जा का स्रोत बनकर उभर सकता है। इससे कार्यकर्ताओं में जोश लौटेगा और पार्टी को एक नया चुनावी नैरेटिव गढ़ने का अवसर मिलेगा। अब यह कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक क्षमता पर निर्भर करेगा कि वह इस उत्साह को 2027 के विधानसभा चुनाव तक कितनी मजबूती से बनाए रख पाती है। फिलहाल इतना तय है कि राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे ने उत्तराखंड कांग्रेस में नई हलचल पैदा कर दी है और यही हलचल आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति का तापमान तय करने में भूमिका निभा सकती है।

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