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  • Written By: Admin
  • Published: November 24, 2025 04:20 PM IST
उत्तराखंड

उत्तराखंड शिक्षा विभाग में वेतन संकट: CRP–BRP और सहायक अध्यापकों की समस्याएँ बढ़ीं

उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में वेतन और वेतनवृद्धि से जुड़ी समस्याएँ एक बार फिर चर्चा में हैं। सैकड़ों शिक्षक और कर्मचारी महीनों से अपने वेतन और इंक्रीमेंट का इंतजार कर रहे हैं। विभाग की प्रक्रियाओं में देरी और अस्पष्ट व्यवस्थाओं के कारण कर्मचारियों में नाराज़गी बढ़ रही है।

तीन महीने बाद भी वेतन नहीं मिला — 580 CRP और BRP परेशान
इस वर्ष सितंबर में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से 955 पदों में से 580 पदों पर CRP और BRP की नियुक्ति हुई थी, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बावजूद वेतन जारी नहीं हुआ। शिक्षा विभाग का कहना है कि MOU के अनुसार पहले वेतन एजेंसी द्वारा दिया जाएगा, फिर विभाग द्वारा भुगतान किया जाएगा। कर्मचारियों का मानना है कि यह व्यवस्था उन्हें आर्थिक रूप से अस्थिर कर रही है। भाजपा नेता रविंद्र जुगरान ने इस देरी को कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया और मामला अपर शिक्षा सचिव तक पहुंचाया।

औपबंधिक सहायक अध्यापकों का इंक्रीमेंट अटका
वर्ष 2001–2003 में नियुक्त 802 शिक्षा मित्रों को 2015 में औपबंधिक सहायक अध्यापक बनाया गया था। शर्त थी कि TET पास होने पर औपबंधन हट जाएगा और नियमित वेतनवृद्धि का लाभ मिलेगा। हालांकि, 69 शिक्षकों ने TET पास किए एक साल से अधिक हो गया, फिर भी उनका औपबंधन नहीं हटाया गया।

उत्तराखंड समायोजित प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ललित द्विवेदी ने कहा:

“RTE Act लागू होने से पहले TET अनिवार्य नहीं था। कुछ शिक्षकों से औपबंधन हटा देना और कुछ को छोड़ देना पूरी तरह असमानता है।”

विभाग का जवाब

  • डॉ. मुकुल सती, निदेशक माध्यमिक शिक्षा: “CRP और BRP का वेतन देने के लिए एजेंसी को निर्देशित कर दिया गया है। MOU में प्रक्रिया स्पष्ट है।”

  • अजय कुमार नौडियाल, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा: “TET पास कर चुके औपबंधिक सहायक अध्यापकों को भर्ती में वरीयता दी जा रही है। मेरिट में आने के बाद ही औपबंधन हटेगा।”

स्थिति गंभीर क्यों?

  • तीन महीने की वेतन देरी से CRP–BRP आर्थिक दबाव में हैं।

  • TET पास करने के बावजूद इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिला।

  • आउटसोर्स प्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

  • समान योग्यता वाले शिक्षकों के बीच असमानता बनी हुई है।

शिक्षा विभाग में वेतन और वेतनवृद्धि से जुड़े मामले व्यवस्थाओं की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं। कर्मचारी स्पष्ट नीति और समयबद्ध भुगतान की मांग कर रहे हैं। अगर विभाग जल्द समाधान नहीं निकालता, तो असंतोष और बढ़ सकता है।

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