ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: January 28, 2026 09:30 PM IST
  • Updated: January 28, 2026 09:38 PM IST
उत्तराखंड

समान नागरिक संहिता दिवस पर शबाना सैफी ने संविधान के अनुच्छेद 44 के महत्व पर डाला प्रकाश

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता दिवस के उपलक्ष्य में नारी शक्ति एवं बाल विकास जन जागृति समिति की अध्यक्ष शबाना सैफी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 44 संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में शामिल है, जिसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है, जिससे धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव न हो।शबाना सैफी ने कहा कि वर्तमान समय में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषयों पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जिससे असमानता की स्थिति बनती है। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य इन सभी मामलों में समानता और न्याय सुनिश्चित करना है, ताकि हर नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा मिल सके। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के हितों की बात करते हुए कहा कि समान कानून महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें सामाजिक न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर अधिवक्ता रुबीना सैफी ने महिलाओं से संबंधित कानूनों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यूजीसी कानूनों, कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित कानून, घरेलू हिंसा अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम और महिलाओं के कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा संस्थानों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी द्वारा बनाए गए नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिनकी जानकारी हर महिला को होनी चाहिए।अधिवक्ता रुबीना सैफी ने कहा कि कानून तभी प्रभावी होते हैं जब महिलाओं को उनके अधिकारों की सही जानकारी हो। जागरूकता के माध्यम से ही महिलाएं अपने खिलाफ हो रहे अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा सकती हैं।
अंत में शबाना सैफी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता दिवस मनाने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम समाज में कानूनी जागरूकता, समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम बताया हैं।

ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×