देवभूमि उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था उस समय हिल गई, जब रायपुर क्षेत्र के ननूरखेड़ा स्थित प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय में हुए घटनाक्रम ने प्रदेशभर के शिक्षक-कर्मचारियों को आक्रोशित कर दिया। अब 40 से अधिक संगठनों ने एकजुट होकर साफ शब्दों में कहा है— “विधायक काऊ की गिरफ्तारी हो, या फिर सार्वजनिक मंच पर आकर माफी मांगे।”
यह पूरा विवाद निदेशक प्रारंभिक शिक्षा अजय नौडियाल के कार्यालय में सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट और तोड़फोड़ के आरोपों के बाद शुरू हुआ। मामले में देहरादून पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर सहित चार अभियुक्तों को गिरफ्तार भी किया है, लेकिन शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि पर कार्रवाई नहीं होगी, न्याय अधूरा रहेगा।
राजकीय शिक्षक संगठनों ने इसे राज्य की गरिमा के खिलाफ बताते हुए प्रदेश स्तर पर संयुक्त मोर्चा बनाया है। उनका कहना है कि उत्तराखंड जैसे शांत प्रदेश में इस प्रकार की घटना अत्यंत निंदनीय है। शिक्षा विभाग में 23 फरवरी से दो दिवसीय कार्य बहिष्कार शुरू हो चुका है, जबकि 25 फरवरी से अन्य विभागीय कर्मचारी भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रदेश में एक लाख से अधिक शिक्षक-कर्मचारी हैं और सभी में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब शिक्षा निदेशक को धरने पर बैठना पड़ा—यह स्थिति अपने आप में गंभीर संकेत देती है।
संयुक्त मोर्चा की ओर से भाजपा विधायक उमेश काऊ की गिरफ्तारी की मांग उठाई गई है। हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए गिरफ्तारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। संगठन प्रतिनिधियों ने दो-टूक कहा है कि या तो गिरफ्तारी हो या विधायक सार्वजनिक मंच से माफी मांगें।
उधर विधायक काऊ ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए माफी मांगी है और कहा है कि उन्होंने स्थिति को रोकने की भरपूर कोशिश की थी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रदेश में बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो इसका सीधा असर परीक्षाओं और शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल निगाहें सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हैं—क्या सख्त कदम उठाए जाएंगे या संवाद के जरिए समाधान निकलेगा? प्रदेश का शिक्षा तंत्र इस सवाल के जवाब का इंतजार कर रहा है।






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