हल्द्वानी। उत्तराखंड में मॉनसून की शुरूआत के साथ ही वन विभाग ने जंगलों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। वन्यजीव तस्करी और जंगलों में होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दृष्टि से वन विभाग 25 जून से ऑपरेशन मॉनसून शुरू करने का फैसला लिया है। इसके तहत गश्ती दलों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा जाएगा और जंगलों की निगरानी के लिए ड्रोन और आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा।
मॉनसून के मौसम में जंगलों की सुरक्षा वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। बारिश के कारण वन क्षेत्रों में आवाजाही प्रभावित होती है और कई दुर्गम इलाके निगरानी की पहुंच से दूर हो जाते हैं। ऐसे में वन्यजीव तस्कर और असामाजिक तत्व सक्रिय होने की कोशिश करते हैं। इसी को देखते हुए वन विभाग ने 25 जून से ऑपरेशन मॉनसून शुरू करने का निर्णय लिया है।
वेस्टर्न सर्किल के कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट नीतीश मणि त्रिपाठी का कहना है कि वेस्टर्न सर्किल के पांच वन प्रभागों को विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है, जहां पूर्व में वन्यजीव तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के मामले सामने आ चुके है। इन वन क्षेत्रों की सीमाएं उत्तर प्रदेश और नेपाल से जुड़ीं होने के कारण विभाग के सामने सुरक्षा की अतिरिक्त चुनौती रहती है। मॉनसून के दौरान जंगलों की सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ जाता है, जबकि घनी झाड़ियों के कारण गश्त करना भी मुश्किल हो जाता है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए वन विभाग ने इस बार विशेष रणनीति बनाई है। संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाएगी, जबकि जलाशयों और डैम क्षेत्रों में नावों के माध्यम से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा ड्रोन कैमरों से जंगलों पर आसमानी नजर रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन मॉनसून के तहत केवल गश्ती व्यवस्था ही नहीं, बल्कि मॉनिटरिंग सिस्टम को भी और मजबूत किया जा रहा है। जंगलों में जीएसएम (ग्लोबल सिस्टम ऑफ मोबाइल कम्युनिकेशन) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो वन क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इससे संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।






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