एक सैनिक कभी रिटायर नहीं होता, बदलती है सिर्फ उसकी भूमिका। बागेश्वर के कैप्टन नारायण सिंह ने इसे बार-बार सही साबित किया है। रिटायर्ड कैप्टन नारायण सिंह यूथ इंडिया अकादमी चलाते हैं, जिसके जरिए युवाओं को सैन्य भर्ती की निशुल्क तैयारी कराई जाती है। उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि 2017 के बाद अब तक अकादमी में ट्रेनिंग ले चुके 350 से अधिक युवा सैन्य, अर्ध-सैन्य बलों और पुलिस में भर्ती हो चुके हैं।
साल 2025 में ही 55 युवा यहां से ट्रेनिंग लेकर सेना में अग्निवीर बने हैं। शनिवार को सेना में चयनित युवाओं के अकादमी पहुंचने पर मैदान में उत्साह, गर्व और उपलब्धि का अद्भुत माहौल नजर आया। युवाओं ने अपनी सफलता कैप्टन नारायण सिंह के साथ साझा की। कैप्टन ने इस उपलब्धि को युवाओं की मेहनत और अनुशासन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि "पहाड़ का युवा हमेशा मेहनती और अनुशासित रहा है, बस उसे सही दिशा और अवसर की जरूरत होती है। अग्निवीर भर्ती में बड़ी संख्या में चयन इसका प्रमाण है कि निरंतर कठिन परिश्रम और योग्य प्रशिक्षण से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।"
ग्रामीण क्षेत्रों से आए चयनित युवाओं ने बताया कि अकादमी में सुबह से देर शाम तक चलने वाली दौड़, शारीरिक प्रशिक्षण, लिखित तैयारी और मानसिक अनुशासन ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बनाया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कैप्टन नारायण सिंह के मार्गदर्शन और कठोर प्रशिक्षण को दिया।
अकादमी की शुरुआत और उद्देश्य
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के रूनीखेत गांव के निवासी नारायण सिंह ने 2017 में ऑर्डिनरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद युवाओं को सही मार्गदर्शन देने का संकल्प लिया। उन्होंने देखा कि पहाड़ी क्षेत्र के होनहार युवा सेना और पुलिस की भर्ती में मार्गदर्शन और तैयारी की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए उन्होंने यूथ इंडिया अकादमी की शुरुआत की।
अकादमी में ट्रेनिंग पूरी तरह नि:शुल्क है। कोई फीस या शर्त नहीं है, बस मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति का जुनून चाहिए।
युवाओं की सफलता और प्रभाव
इस साल 55 युवाओं का अग्निवीर में चयन हुआ। पिछले कुछ सालों में अकादमी की ट्रेनिंग से 350 से अधिक युवा सेना, पुलिस और अर्ध-सैन्य बलों में भर्ती हो चुके हैं। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, पौड़ी, नैनीताल जैसे जिलों से युवा अकादमी में ट्रेनिंग लेने आते हैं और मैदान के पास कमरे लेकर रहते हैं।
कैप्टन नारायण सिंह स्वयं सुबह और शाम युवाओं को मैदान में दौड़ाते हैं। उनका कहना है। उनका कहना है:
"हमारा उद्देश्य केवल युवाओं को सेना तक पहुँचाना नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन जीने का तरीका, अनुशासन, नशे से दूर रहना और अच्छा नागरिक बनाना सिखाना है। जो भी यहां आता है, वह चाहे भर्ती हो या नहीं, यहां से अनुशासन और मूल्य लेकर जाए और देश की तरक्की में योगदान दे।"






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