ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: March 02, 2026 07:01 PM IST
  • Updated: March 02, 2026 07:03 PM IST
उत्तराखंड

रुद्रप्रयाग की महिलाएं बना रहीं प्राकृतिक हर्बल रंग: लोकल फॉर वोकल से सशक्त हो रहा स्वरोजगार

रुद्रप्रयाग जनपद में ग्रामीण महिलाएं इस होली पर प्रकृति के रंगों से आजीविका के नए अवसर सजा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय संसाधनों से प्राकृतिक और हर्बल रंग तैयार कर रही हैं, जो बाजार में अच्छी मांग के साथ बिक रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “लोकल फॉर वोकल” अभियान के तहत रुद्रप्रयाग में महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में जवाड़ी, कुमोली, मायकोटी, मेदनपुर और ऊखीमठ क्षेत्र के गांवों में महिलाएं प्राकृतिक रंगों के साथ होली की पारंपरिक मिठाई गुजिया भी तैयार कर रही हैं।
महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे रंग पूरी तरह प्राकृतिक हैं — पालक से हरा, हल्दी से पीला, चुकंदर से गुलाबी-लाल और गेंदा फूल से केसरिया रंग बनाया जा रहा है। रसायनमुक्त होने के कारण ये रंग त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित माने जा रहे हैं, जिससे लोगों में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर होली पर्व को देखते हुए।
इन हर्बल रंगों को जनपद मुख्यालय, स्थानीय बाजारों, विकास भवन तथा हिलांस आउटलेट के माध्यम से बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को घर के पास ही आय का स्थायी स्रोत मिल रहा है और स्वदेशी उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्राकृतिक रंग निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद अब महिलाएं अपने गांवों में ही उत्पादन कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक अनूप कुमार ने बताया कि प्राकृतिक रंगों के निर्माण और बिक्री से महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और यह पहल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि होली पर स्वदेशी और प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करें, ताकि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहें।

ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×