देहरादून/क्षेत्रीय डेस्क। अगर आप भी पुरानी गाड़ियों की खरीद-फरोख्त का काम करते हैं और अभी तक परिवहन विभाग से लाइसेंस नहीं लिया है, तो सावधान हो जाइए। परिवहन विभाग ने ऐसे 'अघोषित' डीलरों के खिलाफ अपनी रणनीति बदल दी है। संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. गुरदेव सिंह के कड़े रुख के बाद अब अवैध रूप से चल रहे कार बाज़ारों और एजेंटों पर कार्रवाई का शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
आरटीओ डॉ. गुरदेव सिंह ने बताया कि विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कई कोनों में लोग बिना किसी अनुमति या पंजीकरण के पुरानी गाड़ियों का शोरूम खोलकर बैठे हैं। इन अवैध संचालकों को न केवल चिन्हित किया गया है, बल्कि उन्हें कारण बताओ नोटिस भी थमा दिए गए हैं। डॉ. सिंह ने दोटूक कहा, "बिना लाइसेंस कारोबार करना कानूनन अपराध है, और ऐसे दोषियों पर अब सीधी छापेमारी कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
आरटीओ ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपनी मेहनत की कमाई किसी अनधिकृत डीलर के पास न फंसाएं। वाहन हमेशा उन्हीं संस्थानों से खरीदें या बेचें जो परिवहन विभाग में पंजीकृत हों। अनधिकृत डीलरों से लेनदेन करने पर अक्सर कागजी हेराफेरी और धोखाधड़ी की आशंका बनी रहती है, जिसका खामियाजा बाद में असली मालिक को भुगतना पड़ता है।
गाड़ी बेचने वालों को विभाग ने एक विशेष सलाह दी है—गाड़ी बेचते ही उसे नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर (RC Transfer) जरूर कराएं। कई बार पुराने मालिक गाड़ी बेचकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन यदि वह वाहन किसी आपराधिक गतिविधि या हादसे में शामिल पाया जाता है, तो कानूनी जिम्मेदारी पुराने मालिक की ही तय होती है। विभाग का लक्ष्य इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है ताकि खरीदार और विक्रेता दोनों सुरक्षित रहें।
आरटीओ की चेतावनी: > "हमारा उद्देश्य व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। छापेमारी का अभियान लगातार जारी रहेगा।" — डॉ. गुरदेव सिंह, आरटीओ






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