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  • Written By: Admin
  • Published: February 10, 2026 06:29 PM IST
  • Updated: February 10, 2026 06:30 PM IST
उत्तराखंड

चार श्रम संहिताओं के विरोध में श्रमिक संयुक्त मोर्चा की बाइक रैली, 12 फरवरी की हड़ताल सफल बनाने का आह्वान

ट्रांजिट कैंप:
चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के विरोध में आगामी 12 फरवरी की राष्ट्रीय आम हड़ताल को सफल बनाने के उद्देश्य से श्रमिक संयुक्त मोर्चा की ओर से बुधवार को परशुराम चौक ट्रांजिट कैंप से गांधी पार्क तक बाइक रैली निकाली गई। रैली से पूर्व परशुराम चौक पर एक संक्षिप्त सभा का आयोजन भी किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि 12 फरवरी को देशभर में चार श्रम संहिताओं को लागू करने से रोकने की मांग को लेकर आम हड़ताल की जा रही है, जिसे व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर पूंजीपतियों के पक्ष में चार श्रम संहिताएं लागू कर दी हैं, जिससे मजदूरों का शोषण बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि मजदूर पहले से ही शोषण और असुरक्षा के दौर से गुजर रहे हैं और नए श्रम कानूनों से हालात और बदतर हो जाएंगे।

‘मीठे शब्दों में मजदूरों को गुमराह किया जा रहा’

सभा में सीएसटीयू के मुकुल ने कहा कि सरकार चार श्रम संहिताओं को आकर्षक शब्दों में पेश कर मजदूरों को गुमराह कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने 29 श्रम कानूनों में मजदूरों को मिले अधिकारों में कटौती कर चार नई श्रम संहिताएं बनाई गई हैं।

उन्होंने कहा कि पहले श्रमिक अपनी योग्यता के आधार पर 58 वर्ष की आयु तक स्थायी नौकरी पा लेते थे, लेकिन नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद स्थायी नौकरी की जगह फिक्स्ड टर्म रोजगार मिलेगा। इससे मजदूरों पर हायर एंड फायर नीति के तहत हमेशा नौकरी जाने का खतरा बना रहेगा।

यूनियन बनाना होगा मुश्किल

वक्ताओं ने कहा कि नए श्रम कानूनों के तहत मजदूरों के लिए यूनियन बनाकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना लगभग असंभव हो जाएगा। इससे कंपनियों को मजदूरों का बेतहाशा शोषण करने की खुली छूट मिल जाएगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब 300 श्रमिकों तक की इकाइयों को बिना राज्य सरकार की अनुमति बंद करने का अधिकार दे दिया गया है, जबकि पहले यह सीमा 100 श्रमिकों की थी।

पूंजीपतियों के हित में कानून बनाने का आरोप

वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश के श्रम बल को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने की कोशिश कर रही है और अडानी-अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के हित में नीतियां बना रही है। इसे उन्होंने संविधान विरोधी करार दिया।

ये रहे मौजूद

इस दौरान भाकपा (माले) के ललित मटियाली, इंकलाबी मजदूर केंद्र के दिनेश चंद्र, ऐक्टू जिला सचिव अनिता अन्ना, हरेंद्र सिंह, महेंद्र राणा, जगमोहन, पुष्कर खाती, भीम सिंह, कमल, डूंगर सिंह, धीरज जोशी, हीरा राठौर सहित दर्जनों श्रमिक मौजूद रहे।

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