राज्य सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी उत्तराखंड) द्वारा विद्यालयी शिक्षा निदेशालय के सहयोग से 10 फरवरी 2026 को देहरादून में विभिन्न राजकीय विद्यालयों में “सेफर इंटरनेट डे” के तहत व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यशालाओं में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य प्रतिभागियों को साइबर क्राइम, ऑनलाइन फ्रॉड और एआई के दुरुपयोग के प्रति सतर्क किया गया।
एनआईसी अधिकारियों ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड, डीपफेक जैसे एआई आधारित अपराधों से समाज को सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता फैलाना है। साथ ही स्वयं और अपने परिजनों को डिजिटल खतरों से बचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
भारत सरकार द्वारा हर वर्ष फरवरी के दूसरे मंगलवार को सेफर इंटरनेट डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डिजिटल दुनिया में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सुरक्षित, जिम्मेदार और सकारात्मक इंटरनेट वातावरण को बढ़ावा देना है।
इस वर्ष यह दिवस “स्मार्ट तकनीक, सुरक्षित विकल्प: एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग” थीम पर केंद्रित रहा।
कार्यक्रम के तहत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजपुर रोड और राजकीय इंटर कॉलेज, रायपुर में लगभग 200 विद्यार्थियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। इसके अलावा वर्चुअल माध्यम से 1100 से अधिक स्कूलों के लगभग 30 हजार विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
करीब 200 स्थानों से यूट्यूब लिंक के माध्यम से भी कार्यक्रम को देखा गया। इस दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल भी पूछे।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को—
साइबर बुलिंग
व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता
ऑनलाइन फ्रॉड (फिशिंग, बैंकिंग धोखाधड़ी)
साइबर हाइजीन और एआई के जिम्मेदार उपयोग
के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी, फोटो और लोकेशन साझा न करें
अनजान ईमेल या मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें
ऑनलाइन ठगी की स्थिति में cybercrime.gov.in पर शिकायत करें
या टोल फ्री नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क करें
इस अवसर पर राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी एवं उपमहानिदेशक ए.के. दधीचि सहित एनआईसी टीम के राजीव जोशी, हिमांशु कुमार, पुष्पांजलि, कैलाश किमोठी, रोहित चंद्रा, शक्ति रतूड़ी, कनुप्रिया गाबा, रचना और सौरभ रतूड़ी उपस्थित रहे।






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