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  • Written By: Admin
  • Published: February 10, 2026 06:34 PM IST
  • Updated: February 10, 2026 06:34 PM IST
उत्तराखंड

4 श्रम संहिताओं के विरोध में 12 फरवरी की हड़ताल में उतरेंगी आशा वर्कर्स, रुद्रपुर में प्रदर्शन का ऐलान

रुद्रपुर:
चार श्रम संहिताओं को मजदूर अधिकारों पर आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा हमला बताते हुए उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) ने 12 फरवरी को आहूत राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में पूरी ताकत से शामिल होने का ऐलान किया है। हड़ताल को लेकर यूनियन की गदरपुर ब्लॉक कमेटी की बैठक के बाद संबंधित चिकित्साधिकारी को विधिवत नोटिस भी सौंपा गया।

यूनियन की जिला उपसचिव अनीता अन्ना ने कहा कि मोदी सरकार मजदूरों और महिला कामगारों के अधिकारों पर लगातार हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर्स की स्थिति सभी उत्पीड़ित श्रमिकों में सबसे बदतर है।

“आशाओं को श्रमिक का दर्जा तक नहीं दिया जाता। उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जाता है और बदले में सिर्फ नाममात्र की प्रोत्साहन राशि दी जाती है,”
उन्होंने कहा।

अनीता अन्ना ने बताया कि शिशु मृत्यु दर कम करने और गर्भवती महिलाओं की देखरेख में आशा वर्कर्स की अहम भूमिका है। इसके बावजूद उन्हें आधी रात में बिना किसी संसाधन और विभागीय सहयोग के काम करना पड़ता है। सरकार लगातार नए-नए काम का बोझ बढ़ा रही है, जिसे यूनियन किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी।

रुद्रपुर गल्ला मंडी में होगा प्रदर्शन

उन्होंने कहा कि 12 फरवरी को ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत अखिल भारतीय आम हड़ताल के तहत आशा वर्कर्स रुद्रपुर गल्ला मंडी में प्रदर्शन करेंगी। इस दौरान—

  • चार श्रम संहिताएं वापस लेने

  • आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने

  • न्यूनतम वेतन ₹35,000 करने

  • रिटायरमेंट पर पेंशन

  • अस्पतालों में सम्मानजनक व्यवहार

  • ट्रेनिंग स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराने

  • ट्रेनिंग अवधि में प्रतिदिन ₹500 भुगतान

  • सभी बकाया राशि के तत्काल भुगतान

  • हर माह का पैसा उसी माह खाते में भेजने

जैसी मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

‘आशाओं का हो रहा खुला शोषण’

यूनियन की जिला अध्यक्ष ममता पानू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार आशा वर्कर्स को न न्यूनतम वेतन दे रही है और न ही कर्मचारी का दर्जा, जिससे उनका खुला आर्थिक शोषण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट लगातार घटाया जा रहा है, जिससे आशा वर्कर्स की स्थिति और बदतर हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि हड़ताल के माध्यम से मुख्यमंत्री द्वारा खटीमा में दिए गए उस आश्वासन को लागू करने की मांग की जाएगी, जिसमें आशा यूनियन से डीजी हेल्थ के प्रस्ताव को लागू करने की बात कही गई थी।

“आशाओं को नियमित वेतन, पक्की नौकरी और सम्मान से कम कुछ भी मंजूर नहीं,”
ममता पानू ने कहा।

ये रहीं मौजूद

बैठक और आंदोलन की तैयारियों में ब्लॉक कोषाध्यक्ष लक्ष्मी देवी, राधारानी, सुमन, अमन कौर, फातिमा, सुरेंद्र कौर, सरिता देवी, रामेश्वरी देवी, शमीम जहां, सुषमा रानी, नीलम रानी, सुनीता रानी, आरती अरोरा सहित बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद रहीं।

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