मसूरी विधायक और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। झड़ीपानी क्षेत्र में आपदा से जुड़े पुनर्निर्माण कार्यों पर पत्रकारों के सवाल के जवाब में मंत्री जोशी ने कहा कि “पहले पहचान लूं कि आपदा पीड़ित कौन हैं, तभी मदद पर विचार किया जाएगा।”
मंत्री का यह वक्तव्य तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
पत्रकारों ने उनसे सितंबर माह में झड़ीपानी में हुई भारी तबाही के बाद राहत और पुनर्निर्माण कार्यों की स्थिति के बारे में सवाल पूछा था। इस पर मंत्री ने यह भी कहा कि “झड़ीपानी आपदा में न कोई मरा, न कोई बड़ी क्षति हुई।”
हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुसार यह जानकारी तथ्यों से मेल नहीं खाती। 15 सितंबर को भारी वर्षा और भूस्खलन से झड़ीपानी टोल बस्ती में कई मजदूर परिवारों के घर ध्वस्त हो गए थे, जबकि एक मजदूर की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। करीब एक दर्जन परिवार अब भी खतरे के साये में जी रहे हैं। घरों और मुख्य मार्ग पर गहरी दरारें पड़ चुकी हैं, जहां सितंबर से आवागमन पूरी तरह बंद है। तेज बारिश की स्थिति में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है।
मंत्री के बयान पर समाजसेवी सोनिया आनंद रावत ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आपदा राहत सरकार का दायित्व है और इसमें किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंत्री यह तय करेंगे कि किस पार्टी से जुड़े लोगों को ही राहत दी जाएगी?
मंत्री गणेश जोशी का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने के कई प्रयास किए गए। इस दौरान उन्हें फोन कॉल और व्हाट्सऐप संदेश भेजे गए, लेकिन खबर लिखे जाने तक न तो उन्होंने कॉल रिसीव की और न ही 10 घंटे बाद तक किसी संदेश का जवाब दिया।






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