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  • Written By: Admin
  • Published: February 28, 2026 02:30 PM IST
  • Updated: February 28, 2026 02:32 PM IST
उत्तराखंड

MLA-शिक्षा निदेशक विवाद पर पूर्व सीएम हरीश रावत का तीखा वार: बोले- 'करे कोई, भरे कोई', सरकार ने दफ्तरों में जनता का प्रवेश 'प्रतिबंधित' किया

देहरादून: उत्तराखंड में विधायक और शिक्षा निदेशक के बीच हुए विवाद के बाद मचे सियासी घमासान में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धामी सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके सहयोगियों द्वारा शिक्षा निदेशक के साथ मारपीट के वीडियो वायरल होने के बाद, सरकार द्वारा सरकारी दफ्तरों के लिए जारी की गई नई एसओपी (SOP) पर रावत ने तंज कसा है।

“करे कोई, भरे कोई!”

हरीश रावत ने तीखे लहजे में कहा कि मारपीट विधायक ने की और दंड उत्तराखंड की जनता भुगत रही है। रावत ने कहा:

“सरकारी अधिकारी को कार्यालय में घुसकर मारा गया, वह भी भाजपा के माननीय विधायक जी के नेतृत्व में। और दंड भुगते उत्तराखंड की जनता! सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा के नाम पर जो नए नियम लागू किए हैं, उससे अब सरकारी दफ्तरों में लोगों का जाना लगभग प्रतिबंधित हो गया है।”

“पहले ही सुनवाई नहीं, अब तो भगवान ही मालिक”

पूर्व सीएम ने जनता की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले ही दफ्तरों में आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं होती थी, अब नए नियमों के बाद तो स्थिति और भी बदतर हो जाएगी। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “अब तो भगवान ही मालिक है!”

हरीश रावत का 'तंज': “विधायक होना अनिवार्य”

मारपीट के मामले में विधायक द्वारा माफी मांगे जाने और मामला शांत होने पर रावत ने उत्तराखंड में 'नई भारतीय दंड संहिता' लागू होने का तंज कसा। उन्होंने कहा:

“नियम यह है कि सरकारी कर्मचारी को घायल कर दो, खून निकले, मेडिकल हो और वह कहे कि मेरी जान को खतरा है। यदि करने वाला खेद जता दे, तो सब कुछ रफा-दफा! हां, इतना विशेषाधिकार जरूर है कि मारने वाला विधायक होना चाहिए।”

सियासत और आत्मीयता का घालमेल

राजनीतिक गलियारों में सीएम धामी और हरीश रावत के पारिवारिक और आत्मीय रिश्तों की चर्चा हमेशा रहती है, और अक्सर दोनों को मुस्कुराते हुए मिलते देखा जाता है। लेकिन, इस बयान के बाद यह साफ है कि सियासत में अपनी जमीन तलाशने के लिए विपक्ष को टारगेट करना अनिवार्य है, और इस मामले में हरीश रावत का कोई तोड़ नहीं है, जो अक्सर अपनी ही पार्टी के नेताओं को भी असहज कर देते हैं।

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