हल्द्वानी: पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच, हीरानगर में बुधवार को स्वस्ति वाचन, शगुन आंखर और गोल्ज्यू पूजन के साथ उत्तरायणी मेले (घुघुतिया त्यार) का विधिवत आगाज़ हो गया है। यह महोत्सव 7 से 15 जनवरी तक चलेगा।
मेले के मुख्य आकर्षण:
सांस्कृतिक संध्या: पहले दिन अमित गोस्वामी ने 'कैले बजे मुरुली' और हरेंद्र कठायत ने 'न्यौली' व 'उत्तराणी त्यार आयी' जैसे गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पहाड़ी उत्पाद: मेले में मुनस्यारी, पिथौरागढ़, धारचूला और चंपावत से आए हस्तशिल्प व ग्रामोद्योग के 120 से अधिक स्टाल लगाए गए हैं।
विशेष आकर्षण: महिलाओं द्वारा लगाया गया 'सना हुआ नीबू' का स्टाल और बच्चों के लिए रंग-बिरंगे झूले आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
संस्कृति का संरक्षण: मंच के अध्यक्ष खड़क सिंह बगडवाल और संरक्षक हुकुम सिंह कुंवर ने बताया कि 14 जनवरी तक रोजाना कुमाऊंनी परंपराओं पर आधारित कार्यक्रम होंगे। लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने कहा कि ऐसे महोत्सव युवा पीढ़ी को अपनी सभ्यता से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।






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