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  • Written By: Admin
  • Published: February 10, 2026 12:49 PM IST
  • Updated: February 10, 2026 12:52 PM IST
उत्तराखंड

निजी वेंडिंग जोन नीति से हल्द्वानी को जाम और अतिक्रमण से मिलेगी राहत, 1800 ठेला-फड़ वेंडर होंगे व्यवस्थित

हल्द्वानी। निजी जमीनों पर वेंडिंग जोन नीति लागू होने से हल्द्वानी शहर को सड़क किनारे लगने वाले ठेलों, यातायात जाम और अतिक्रमण की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। नगर निगम प्रशासन ने प्राइवेट वेंडिंग जोन पॉलिसी को स्वीकृति दे दी है, जिसके तहत अब निजी भूमि पर बाजार, फूड कोर्ट और चौपाटी विकसित की जा सकेंगी।

इन वेंडिंग जोनों के संचालन के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। वर्तमान में शहर में लगभग 1800 फड़-ठेला वेंडर नगर निगम में पंजीकृत हैं। वेंडिंग जोन निर्धारित न होने के कारण ये वेंडर अब तक सड़कों और मुख्य बाजारों में कारोबार कर रहे थे, जिससे जाम और अतिक्रमण की समस्या बनी रहती थी।

इस समस्या के समाधान के लिए नगर निगम ने निजी जमीनों पर वेंडिंग जोन विकसित करने की नीति तैयार की थी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद अब इस नीति को लागू कर दिया गया है। फिलहाल मुखानी, लालडांठ, नहर कवरिंग, रामपुर रोड समेत विभिन्न क्षेत्रों में निजी भूमि पर फूड कोर्ट खोलने के लिए 25 आवेदन प्राप्त हुए हैं

सुरक्षा और पार्किंग अनिवार्य

बाजार, फूड कोर्ट और चौपाटी में सीसीटीवी कैमरे, शौचालय और पार्किंग की सुविधा अनिवार्य होगी। इन मूलभूत सुविधाओं के बिना नगर निगम द्वारा लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।

100 रुपये से अधिक शुल्क नहीं ले सकेगा भू-स्वामी

निजी वेंडिंग जोन में नगर निगम में पंजीकृत वेंडरों से भू-स्वामी प्रतिदिन 100 रुपये से अधिक शुल्क नहीं ले सकेगा। वहीं अन्य वेंडरों के लिए किराया जमीन स्वामी स्वयं तय कर सकेगा। वेंडिंग जोन के लिए भूमि के आकार का कोई मानक निर्धारित नहीं किया गया है, लेकिन पार्किंग और शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य होगी।

दो स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया शुरू

नगर निगम ने मंगलपड़ाव में ऑटो स्टैंड तथा मंडी बाईपास मार्ग पर वेंडिंग जोन विकसित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही इन स्थानों पर भी व्यवस्थित तरीके से ठेले लगाए जा सकेंगे।

नगर आयुक्त परितोष वर्मा ने बताया कि निजी वेंडिंग जोन में 25 प्रतिशत ठेले नगर निगम में पंजीकृत वेंडरों के लिए आरक्षित होंगे, जिनका किराया सामान्य रहेगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत ठेलों का किराया भूमि स्वामी द्वारा तय किया जाएगा।

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