देहरादून। देवशयनी एकादशी के साथ 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो जाएगा। इस दौरान चार माह तक कथा, पूजा-पाठ व हवन आदि किए जा सकते हैं। नवंबर में देवउठानी एकादशी के साथ ही सभी मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार वर्षाकाल के इस महीने में भगवान विष्णु सभी देवी-देवताओं के साथ पाताल लोक में शयन करते हैं। जो देवउठनी एकादशी पर शयन से जागते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास अथवा चैमासा भी कहते हैं।हिंदू पंचांग के अनुसार अषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी पड़ती है और इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं के अनुसार चातुर्मास में कथा, पूजा-पाठ आदि किए जा सकते हैं। संत व आम लोग धर्म, कर्म, पूजा-पाठ, आराधना में समय बिताते हैं। देवशयनी एकादशी व्रत के अलावा चातुर्मास में भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी रहता है।चातुर्मास व्रत को श्रद्धालु अनुशासन में रहकर करते हैं, तो भगवान कृपा बरसाते हैं। गायत्री चेतना केंद्र बड़ोवाला के जिला समन्वयक सुदर्शन सिंह नेगी ने कहा कि देवशयनी एकादशी के दिन शालिग्राम का गंगाजल और तुलसी से अभिषेक कर पीले वस्त्र अर्पित करने, फल-फूल व मेवा का भोग लगाने और विष्णु सहस्रनाम का पाठ और मंत्र का जप करना विशेष फलदायी माना गया है। इस अवधि में विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते और श्रद्धालु पूजा, जप, तप तथा धार्मिक अनुष्ठानों में अधिक समय व्यतीत करते हैं।दिगंबर जैन समाज का चातुर्मास दो अगस्त से कलश यात्रा के साथ शुरू होगा। अगले चार महीने तक जैन मुनि विचरण नहीं करेंगे। एक ही जगह पर पूजा व धार्मिक प्रवचन देंगे। वहीं, सामूहिक अभिषेक, शांतिधारा, प्रवचन, सामूहिक आरती, कीर्तन, अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं जैसे बड़े आयोजन होंगे। जैन मिलन के कार्यकारी अध्यक्ष एनसी जैन ने बताया कि 24 को नगर प्रवेश के बाद दो अगस्त से चातुर्मास शुरू होगा।






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