उत्तराखंड वन विभाग को नए प्रमुख वन संरक्षक (PCCF) की कमान मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की कमी गंभीर समस्या बन गई है। प्रदेश में लगभग 71% भूभाग वन क्षेत्र में शामिल है, लेकिन इस बड़े क्षेत्र की निगरानी करने वाले वरिष्ठ भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की संख्या चिंता का विषय बन चुकी है। लगातार हो रही सेवानिवृत्तियों ने स्थिति और जटिल कर दी है।
PCCF रैंक के अधिकारियों की कमी
वर्तमान में विभाग में केवल पांच PCCF रैंक के अधिकारी हैं, जिनमें से दो राज्य प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण सक्रिय नहीं हैं। आने वाले दिनों में बीपी गुप्ता और रंजन कुमार मिश्रा की रिटायरमेंट के बाद यह संख्या घटकर सिर्फ तीन रह जाएगी।
CF और DFO स्तर पर भी समस्या
CF रैंक के अधिकारियों की संख्या थोड़ी राहत देती है, लेकिन कई अधिकारी केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर प्रतिनियुक्ति पर हैं। DFO स्तर पर कई वन प्रभागों में अधिकारियों की कमी है, जिससे कई पदों पर दो-दो चार्ज संभालने पड़ रहे हैं। यह फील्ड कार्य को सीधे प्रभावित कर रहा है।
वन मंत्री की प्रतिक्रिया
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की कमी चुनौतीपूर्ण है और विभाग के रिक्त पदों को भरने के लिए नई रणनीति बनाई जाएगी।
विभाग का दावा
प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा ने माना कि वरिष्ठ अधिकारियों की कमी विभाग को प्रभावित कर रही है, लेकिन वर्तमान में कार्यरत अधिकारी दक्ष हैं और विभाग के कामकाज को प्रभावित नहीं होने देंगे।
पिछले एक वर्ष में छह PCCF रैंक के अधिकारी सेवा निवृत्त हो चुके हैं, जिससे रिक्तियों की संख्या बढ़ी और अनुभवी नेतृत्व की जरूरत वाले क्षेत्रों में दबाव बढ़ गया है।






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