देहरादून स्थित लोक भवन में शनिवार को ‘फ्लेवर ऑफ देवभूमि’ पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक केवल व्यंजनों का संग्रह नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा, उसकी पारंपरिक रसोई, संस्कृति और जीवन-दर्शन का जीवंत दस्तावेज है।
पुस्तक में मंडुआ, झंगोरा, जखिया जैसे पारंपरिक अनाजों और मसालों का उल्लेख है, जो स्वाद के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य और औषधीय गुणों के लिए भी जाने जाते हैं। इसे उत्तराखंड की प्राचीन रसोई परंपराओं को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि इन समृद्ध परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने में मातृ-शक्ति की भूमिका केंद्रीय रही है। पहाड़ की महिलाओं ने अपनी मेहनत और संस्कारों से पारंपरिक खान-पान को आज तक सहेज कर रखा है।
वक्ताओं ने कहा कि आज जब दुनिया जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में उत्तराखंड इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम के अंत में पुस्तक से जुड़े सभी रचनाकारों और टीम को इस प्रेरक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी गईं।






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