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  • Written By: Admin
  • Published: November 24, 2025 12:14 PM IST
  • Updated: November 24, 2025 12:15 PM IST
उत्तराखंड

डीएम सविन बंसल की पहल ने बदली बेटी प्रियंका की जिंदगी, मिला नई उड़ान का मौका

आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर परिवार से आने वाली, बिन पिता की होनहार इंजीनियर प्रियंका कुकरेती को जिला प्रशासन देहरादून ने नए जीवन की दिशा दी है। जिला प्रशासन की पहल पर प्रियंका को एक प्रतिष्ठित निजी शैक्षणिक संस्थान में लैब ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया गया है। रोजगार मिलने के बाद प्रियंका अपनी माता के साथ जिलाधिकारी सविन बंसल से मिलकर उन्हें धन्यवाद देने कलेक्ट्रेट पहुंचीं।

2021 में पिता के देहांत के बाद टूटा परिवार, भाई दिव्यांग—आर्थिक स्थिति बेहद खराब

अक्टूबर माह में प्रियंका अपनी माता के साथ जिलाधिकारी से मिली थीं और अपने परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति बताते हुए रोजगार और शिक्षा में सहायता की गुहार लगाई थी। जिलाधिकारी ने तत्काल निर्णय लेते हुए प्रियंका को राइफल फंड से 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की और उनकी योग्यता के अनुरूप निजी संस्थान में रोजगार उपलब्ध कराया।

जिला प्रशासन देगा उच्च शिक्षा का पूरा सहयोग

रोजगार मिलने के बाद जब प्रियंका धन्यवाद देने पहुंचीं, तो जिलाधिकारी ने पूछा कि क्या वह नौकरी के साथ आगे पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं। प्रियंका द्वारा इच्छा जताने पर डीएम सविन बंसल ने एमटेक में तत्काल दाखिले हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।

फीस और शिक्षा से जुड़े अन्य व्यय जिला प्रशासन वहन करेगा

प्रियंका की फीस, पुस्तकें एवं शिक्षा से संबंधित अन्य व्यय जिला प्रशासन और निजी संस्थान संयुक्त रूप से वहन करेंगे। अगले सत्र में प्रियंका का उसी संस्थान में एमटेक में प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा।

जिला प्रशासन का ‘वन-स्ट्रोक मॉडल’: शिक्षा और रोजगार दोनों को पुनर्जीवित करने की पहल

मा. मुख्यमंत्री के “शिक्षित बेटियां—सशक्त समाज” के संकल्प को साकार करने हेतु जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। आर्थिक रूप से कमजोर, बिन पिता की बेटियों और जरूरतमंद छात्राओं को शिक्षा तथा रोजगार दोनों में सहयोग दिया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने कहा—
“प्रतिभाशाली बेटियों की शिक्षा किसी भी हाल में रुकने नहीं दी जाएगी। जिला प्रशासन हर संभव सहायता प्रदान करता रहेगा।”

नंदा–सुनंदा योजना के तहत अब तक 90 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित

जिलाधिकारी के पास प्रतिदिन ऐसे प्रकरण आ रहे हैं, जहां पारिवारिक संकट के कारण होनहार बेटियों की पढ़ाई रुक जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा नंदा–सुनंदा योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 32 लाख रुपये खर्च कर 90 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की जा चुकी है।

प्रियंका कुकरेती का चयन और उनका एमटेक में प्रवेश जिला प्रशासन के इन प्रयासों की एक और सराहनीय उपलब्धि है, जो न केवल एक परिवार को संबल देगा, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक संदेश भी स्थापित करेगा।

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