देहरादून। राजधानी के बंजारावाला क्षेत्र में रविवार को विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में समाज, संस्कार और राष्ट्र के प्रति व्यक्ति के कर्तव्यों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को सही दिशा देना और उन्हें जीवन के मूलभूत मूल्यों से जोड़ना है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि आज आत्ममंथन की आवश्यकता है कि जो संस्कार हमें अपने बुजुर्गों और पूर्वजों से प्राप्त हुए हैं, क्या वही संस्कार हम अपनी आने वाली पीढ़ी को सौंप पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज को सशक्त और संगठित बनाना है तो संस्कारों की यह परंपरा निरंतर बनी रहनी चाहिए।
वक्ताओं ने राष्ट्रभक्ति और समर्पण भाव को समाज की उन्नति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि समाज से प्राप्त हर सुविधा केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्र और धरती की अमानत है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह अपने विचारों, कर्मों और समर्पण के माध्यम से समाज और राष्ट्र के हित में योगदान दे।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति का समर्पण भाव अपने चरम पर होता है, तभी समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। हमें ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनसे समाज प्रेरणा ले सके और हम स्वयं प्रेरणास्त्रोत बनें। व्यक्तिगत जीवन में नैतिकता, अनुशासन और संस्कारों को आत्मसात कर ही इन मूल्यों को प्रभावी रूप से समाज तक पहुंचाया जा सकता है।






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