राज्य के सबसे बड़े शहर देहरादून में कांग्रेस ने पुनः जसविंदर सिंह को महानगर अध्यक्ष पद की कमान सौंपी है। जसविंदर सिंह ने पिछले कार्यकाल में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और शहर की समस्याओं पर लगातार आवाज उठाने का काम किया।
पार्टी ने उन्हें दोबारा कमान सौंपकर यह संकेत दिया कि संगठन में स्थिरता और अनुभव पर भरोसा बनाए रखा जाएगा। साथ ही इस पुनर्नियुक्ति के जरिए पार्टी ने पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, क्योंकि 2027 में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों से पहले गुटबाजी पर नियंत्रण की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्य की राजधानी और सबसे बड़े शहर होने के कारण देहरादून में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकता बेहद जरूरी है, क्योंकि यही क्षेत्र राजनीतिक दृष्टि से चुनावों का केंद्र माना जाता है। पूरे जिले में 10 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से छह सीधे शहर की राजनीति से प्रभावित होती हैं। ऐसे में जसविंदर सिंह की पुनर्नियुक्ति पार्टी की आगामी रणनीति को स्थायित्व देने वाला कदम साबित हो सकती है।
इस साल हुए नगर निगम चुनावों में भी कुछ विवाद और आरोप सामने आए थे। गोगी द्वारा पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा की गई थी। इस दौरान एक होटल की वीडियो वायरल हुई, जिससे कुछ लोगों में नाराजगी देखने को मिली। पार्टी ने इस विरोध को दबाने के लिए कड़े निर्णय लेते हुए कुछ लोगों को निष्कासित भी किया।
चुनाव परिणाम 2018 के मुकाबले अच्छे नहीं रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महानगर अध्यक्ष पद पर वही चेहरा दोबारा लाने से पार्टी के अंदर नाराजगी बढ़ सकती थी, लेकिन कांग्रेस ने गुटबाजी से दूरी बनाए रखते हुए स्पष्ट संदेश दिया है।






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