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  • Written By: Admin
  • Published: February 09, 2026 07:12 PM IST
  • Updated: February 09, 2026 07:13 PM IST
उत्तराखंड

डॉ. नित्यानंद का जीवन हिमालय और राष्ट्र को समर्पित रहा: मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित डॉ. नित्यानंद जन्मशताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सतत हिमालयी पर्यावरण पुरस्कार 2025-26 से श्री जयेंद्र सिंह राणा एवं श्री संजय सत्यवली को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने डॉ. नित्यानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन हिमालय, प्रकृति, समाज और राष्ट्र की सेवा को समर्पित कर दिया। उनकी सोच हिमालय की चोटियों जितनी ऊँची और सेवा-भाव घाटियों जितना गहरा था। उनका मानना था कि हिमालय की रक्षा, भारतीय सभ्यता और राष्ट्र के भविष्य की रक्षा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. नित्यानंद ने विज्ञान को अध्यात्म से, शोध को लोकजीवन से और चिंतन को राष्ट्रहित से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने समाज के हर वर्ग में राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना का संचार किया तथा गांवों के सशक्तिकरण के लिए आजीवन कार्य किया। वे प्रतिवर्ष अपनी आय से लगभग 40 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1991 के उत्तरकाशी और 1999 के चमोली आपदा के बाद डॉ. नित्यानंद ने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर राहत एवं पुनर्वास का अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया, जो आज भी मिसाल माना जाता है। उन्होंने मनेरी गांव को केंद्र बनाकर 400 से अधिक भूकंपरोधी मकानों का निर्माण कराया और 50 से अधिक गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. नित्यानंद द्वारा गठित ‘उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति’ आज भी देशभर में आपदाओं के समय मानवता की सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण है। देहरादून में स्थापित डॉ. नित्यानंद हिमालय शोध एवं अध्ययन केंद्र उनके विचारों को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण के लिए सतत प्रयास कर रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान, सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध और डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम के माध्यम से अब तक 72 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई है।

उन्होंने बताया कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए पौधारोपण, जल संरक्षण और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सौर ऊर्जा सहित हरित ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण हेतु स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसर पर एक पौधा अवश्य लगाएं और उसका संरक्षण करें, ताकि देवभूमि उत्तराखंड को पर्यावरण की दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

कार्यक्रम में आरएसएस अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र, विधायक श्री विनोद चमोली, श्री मुन्ना सिंह चौहान, श्री बृजभूषण गैरोला, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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