लालकुआं। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी एवं बिंदुखत्ता की बसासत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले समाजसेवी का आज निधन हो गया। उनके निधन की खबर से जहां क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है, वहीं परिवार में कोहराम मचा हुआ है। कामरेड राजा बहुगुणा उत्तराखंड राज्य की लड़ाई के लिए लंबे समय तक संघर्ष करते रहे और बिंदुखत्ता की बसासत के संघर्ष के प्रमुख योद्धा रहे। 68 वर्षीय राजा बहुगुणा अपने पीछे पत्नी और पुत्री समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे उत्तराखंड के प्रमुख आंदोलनों के साक्षी रहे। चिपको आंदोलन और महतोशमोड़ आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके चलते वह पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र रहे।
उत्तराखंड में जन आंदोलनों का चर्चित नाम और भाकपा (माले) के संस्थापकों में से एक तथा पार्टी के केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के चेयरमैन कामरेड राजा बहुगुणा का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। वे कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनका निधन दिल्ली के बीएल कपूर मैक्स अस्पताल में हुआ है। पिछले पांच दशकों से कामरेड राजा बहुगुणा ने कई जन संघर्षों की अगुआई की और एक नए समाज की स्थापना के लिए अपने को समर्पित किया। उनके नेतृत्व में चले संघर्षों ने उत्तराखंड में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को तैयार किया।
भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता कामरेड कैलाश पांडे ने बताया कि आज शाम स्वर्गीय राजा बहुगुणा का पार्थिव शरीर बिंदुखत्ता स्थित प्रांतीय कार्यालय में लाया जाएगा, जहां अंतिम दर्शनों के बाद शनिवार को चित्रशिला घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।






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