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  • Written By: Admin
  • Published: February 18, 2026 02:09 PM IST
  • Updated: February 18, 2026 02:11 PM IST
उत्तराखंड

शराब फैक्ट्री पर आयकर का 'सर्जिकल स्ट्राइक': सीबीगंज में सुपीरियर डिस्टिलरी पर आधी रात छापा; मोबाइल जब्त, दस्तावेजों में छिपे राज खंगाल रही टीम!

बरेली। सीबीगंज औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार की रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब दर्जनों वाहनों का काफिला सुपीरियर शराब फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर जाकर रुका। आयकर विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई ने फैक्ट्री प्रबंधन को संभलने का मौका तक नहीं दिया। रात के अंधेरे में शुरू हुई यह जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, शराब कारोबार से जुड़े अन्य दिग्गजों के पसीने छूटने लगे।

किले में तब्दील हुई फैक्ट्री, मोबाइल हुए जब्त टीम ने प्रवेश करते ही सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था को अपने हाथ में लिया और फैक्ट्री मालिक, मैनेजर व अकाउंट सेक्शन के प्रभारियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए। सूत्रों का कहना है कि विभाग को लंबे समय से टैक्स चोरी और आय से अधिक संपत्ति के इनपुट मिल रहे थे। अधिकारियों ने डिजिटल डाटा, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अकाउंट्स की फाइलें कब्जे में लेकर वित्तीय लेन-देन की पड़ताल शुरू कर दी है।

कर्मचारी अंदर, गतिविधियां नियंत्रित छापेमारी के दौरान फैक्ट्री के भीतर मौजूद कर्मचारियों की आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रित कर दिया गया है। हालांकि, उत्पादन से जुड़े आवश्यक कार्यों को रुकवाया नहीं गया है, लेकिन प्रशासनिक और कागजी गतिविधियों पर आयकर टीम का पूरा पहरा है। स्थानीय पुलिस बल भी फैक्ट्री के बाहर मुस्तैद रहा ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति अंदर न जा सके।

शहर के 'शराब सिंडिकेट' में बेचैनी सुपीरियर फैक्ट्री पर इस बड़ी कार्रवाई के बाद बरेली और आसपास के जिलों के बड़े शराब कारोबारियों में खलबली मची हुई है। चर्चा है कि इस फैक्ट्री से जुड़े अन्य व्यापारिक संपर्कों और निवेशों की भी जांच की जा सकती है।

थाना प्रभारी को नहीं थी भनक हैरानी की बात यह रही कि स्थानीय सीबीगंज थाना पुलिस को भी इस रेड की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। थाना प्रभारी प्रदीप चतुर्वेदी ने बताया कि छापेमारी की सूचना उन्हें बाद में मिली। फिलहाल, आयकर विभाग के अधिकारियों ने मीडिया से दूरी बना रखी है और किसी भी तरह के आधिकारिक बयान से इनकार किया है।

आयकर विभाग की यह कार्रवाई कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीम अपने साथ लैपटॉप और विशेष सॉफ्टवेयर लेकर पहुंची है ताकि 'डिलीट' किए गए डेटा को भी रिकवर किया जा सके। जांच के बाद कई सफेदपोश चेहरों से नकाब उतर सकता है।

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