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  • Written By: Admin
  • Published: February 18, 2026 03:17 PM IST
  • Updated: February 18, 2026 03:21 PM IST
उत्तराखंड

होली पर लग रहा है चंद्रग्रहण; 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को खेली जाएगी रंगों की होली, देखें शुभ समय।

होली 2026: अबकी बार नहीं होगा तारीखों का फेर; एक ही दिन खिलेगा अबीर-गुलाल, चंद्रग्रहण ने बदला होलिका दहन का गणित

ज्योतिष डेस्क। त्योहारों की तिथियों को लेकर अक्सर पंडितों और पंचांगों के बीच रहने वाला मतभेद इस साल दूर हो गया है। वर्ष 2026 की होली एक नई मिसाल पेश करेगी, जहाँ कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरा देश एक ही दिन रंगों के उत्सव में डूबा नजर आएगा। तिथियों की स्पष्टता ने श्रद्धालुओं और बाजार, दोनों के उत्साह को दोगुना कर दिया है।

24 फरवरी से थम जाएंगे मांगलिक कार्य होली की आहट 24 फरवरी से ही सुनाई देने लगेगी। इसी दिन से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं, जिसके चलते विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। इसके बाद 27 फरवरी को आंवला एकादशी पर सुबह 11:32 बजे से पहले ‘चीर बंधन’ के साथ होली का आगाज होगा।

चंद्रग्रहण का साया: 2 मार्च को जलेगी होलिका इस साल का सबसे बड़ा ज्योतिषीय मोड़ 3 मार्च को लगने वाला खग्रास चंद्रग्रहण है। पूर्णिमा के दिन लगने वाले इस ग्रहण के कारण होलिका दहन एक दिन पहले यानी 2 मार्च को ही संपन्न कर लिया जाएगा।

  • होलिका दहन मुहूर्त: शाम 6:09 बजे से रात 8:39 बजे तक।

  • रंगों वाली होली: 4 मार्च (बुधवार) को धूमधाम से मनाई जाएगी।

3 मार्च को 'खग्रास चंद्रग्रहण' और सूतक का प्रभाव स्नान-दान की पूर्णिमा यानी 3 मार्च को आसमान में खगोलीय घटना का बड़ा मंजर दिखेगा। दोपहर 3:20 बजे से शुरू होने वाला यह ग्रहण शाम 6:47 बजे तक रहेगा।

विशेष ध्यान दें: ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:20 बजे से ही शुरू हो जाएगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और पूजा-पाठ वर्जित होगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य होगा, इसलिए इसके नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

भद्रा और मुहूर्त का गणित विद्वानों के अनुसार, 27 फरवरी को रात 10:33 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा, इसलिए ध्वजारोहण और चीर बंधन जैसे अनुष्ठान सुबह के मुहूर्त में करना ही श्रेष्ठ होगा। तिथियों की इस स्पष्टता से धर्मावलंबियों में भारी उत्साह है। अब बिना किसी संशय के लोग अपने प्रियजनों के साथ उत्सव की योजना बना सकेंगे।

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