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  • Written By: Admin
  • Published: November 28, 2025 04:19 PM IST
  • Updated: November 28, 2025 04:19 PM IST
उत्तराखंड

अर्द्धकुंभ 2025: हरिद्वार में शंखनाद के साथ घोषित हुई स्नान तिथियां

हरिद्वार: धार्मिक आस्था और परंपराओं की धुरी हरिद्वार में अर्द्धकुंभ 2027 की तैयारियां तेज़ी से धरातल पर आकार ले रही हैं। शुक्रवार को डामकोठी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे। बैठक का उद्देश्य अर्द्धकुंभ को दिव्य, भव्य और अनुशासित स्वरूप देने के लिए व्यापक रणनीति पर मंथन करना था। इस अवसर पर स्नान तिथियों की घोषणा भी की गई।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद निरंजनी के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि अखाड़े कुंभ परंपरा के वास्तविक संरक्षक हैं और पूरा देश हरिद्वार के अर्द्धकुंभ को नई उम्मीदों के साथ देख रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा समय रहते तैयारियों की शुरुआत को सराहनीय कदम बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने संत समुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी हर सलाह का सम्मानपूर्वक पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अर्द्धकुंभ 2027 एक शानदार आयोजन होगा, जिसके लिए प्रशासनिक व्यवस्थाएं युद्धस्तर पर आगे बढ़ाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि मेले की औपचारिक शुरुआत 13 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के दिन होगी।

पहली बार चार शाही स्नान, परंपरा में ऐतिहासिक विस्तार

संत समाज ने इस बार ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पहली बार चार शाही अमृत स्नान तय किए हैं। यह कदम सदियों पुरानी परंपराओं में महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय विकास माना जा रहा है।

मुख्य पर्व स्नान तिथियां:

  • 14 जनवरी 2027 — मकर संक्रांति

  • 6 फरवरी 2027 — मौनी अमावस्या

  • 11 फरवरी 2027 — बसंत पंचमी

  • 20 फरवरी 2027 — माघ पूर्णिमा

चार शाही स्नान:

  • 6 मार्च 2027 — महाशिवरात्रि (पहला अमृत स्नान)

  • 8 मार्च 2027 — सोमवती/फाल्गुन अमावस्या (दूसरा अमृत स्नान)

  • 14 अप्रैल 2027 — मेष संक्रांति/वैशाखी (तीसरा अमृत स्नान)

  • 20 अप्रैल 2027 — चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान)

अन्य विशेष पर्व:

  • 7 अप्रैल — नव संवत्सर

  • 15 अप्रैल — राम नवमी

स्नान तिथियों के इस व्यापक कैलेंडर को संत समुदाय ने हर्षपूर्वक स्वीकार किया। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को यात्रा योजना बनाने में सुविधा मिलेगी, बल्कि अर्द्धकुंभ को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की भी उम्मीद है।

आगामी अर्द्धकुंभ धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और उत्तराखंड के विकास का अद्वितीय संगम बनने जा रहा है।

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