देहरादून में बिल्डरों और शराब कारोबारियों के खिलाफ आयकर विभाग की लगातार छापेमारी ने शुक्रवार को बड़ा खुलासा कर दिया। तीन दिनों से चल रही कार्रवाई के दौरान अचानक हाथ लगे कुछ अहम दस्तावेजों ने पूरे ऑपरेशन की दिशा बदल दी। इन्हीं कागजात के आधार पर विभाग ने बिल्डर रमेश बत्ता के एक ‘अघोषित’ दफ्तर का पता लगाया, जिसे वह वर्षों से सभी जांच एजेंसियों से छुपाता आ रहा था।
जैसे ही सूचना मिली कि बल्लूपुर चौक स्थित बनारस कैफे की बिल्डिंग में बत्ता का गुप्त ऑफिस संचालित हो रहा है, टीम ने तुरंत पहुंचकर दफ्तर को सील करते हुए जांच शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार, विभाग शुक्रवार को छापेमारी समाप्त करने की तैयारी में था, तभी दस्तावेजों की छंटाई के दौरान मिले कागजात और डिजिटल फाइलों ने बड़ा संकेत दिया। क्रॉस–चेकिंग के बाद नया ठिकाना कन्फ़र्म होते ही ऑपरेशन को बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद दिल्ली और देहरादून के 20 ठिकानों पर देर रात तक छापेमारी जारी रही।
आयकर विभाग ने रियल एस्टेट से जुड़े
राकेश बत्ता, रमेश बत्ता, विजेंद्र पुंडीर, इंदर खत्री
और शराब कारोबारियों
कमल अरोड़ा व प्रदीप वालिया
के ठिकानों से अब तक 3 करोड़ से अधिक नकदी और 7 करोड़ रुपए से ज्यादा के आभूषण–बुलियन बरामद किए हैं। सभी सामग्री जांच पूरी होने तक विभागीय कस्टडी में रखी गई है।
पूछताछ में कई कारोबारी दावा कर रहे हैं कि बरामद ज्वेलरी पहले से घोषित थी, कुछ 1997 की भी।
लेकिन विभाग का सवाल है—
“घोषित आभूषण बुलियन में कैसे बदले? कौन-सा प्रोसेस अपनाया गया?”
इस पर अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
विभाग के हाथ 22 बैंक लॉकरों की जानकारी भी लगी है, जो बिल्डरों और शराब कारोबारियों से जुड़े हैं।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार इनमें दस्तावेज और आभूषण ज्यादा हैं, जबकि नकदी बेहद कम मिली है।






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