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  • Written By: Admin
  • Published: November 17, 2025 03:35 PM IST
उत्तराखंड

“सीएम धामी के ड्रीम प्रोजेक्ट को झटका! शारदा नदी किनारे नगर पालिका ने खड़ा किया कूड़ा डंपिंग ज़ोन”

चंपावत: जिले के टनकपुर में शारदा कॉरिडोर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, लेकिन यहां टनकपुर नगर पालिका इसकी गंभीरता का मखौल उड़ाती दिखाई दे रही है। नगर पालिका प्रशासन लंबे समय से शारदा नदी के किनारे कूड़ा डंपिंग जोन बनाकर पूरे शहर का कूड़ा वहीं फेंक रहा है। कूड़े के ढेर से उठती दुर्गंध और उसे जलाने से फैलता धुआं पूरा शारदा घाट क्षेत्र प्रदूषित कर रहा है। यहां तक कि पूर्णागिरि दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग पर खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद ना एनजीटी और ना ही स्थानीय प्रशासन इस समस्या को लेकर संजीदा दिखाई दे रहा है।

टनकपुर का कूड़ा डंपिंग जोन बना बड़ी मुसीबत

पूरे देश में स्वच्छता मिशन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में भी शहरी विकास विभाग ने कूड़ा प्रबंधन को लेकर कई योजनाएं लागू की हैं। इसके बावजूद सीएम धामी की विधानसभा क्षेत्र चंपावत के टनकपुर नगर पालिका परिषद द्वारा स्वच्छ भारत मिशन की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
नगर पालिका ने नगर क्षेत्र के शारदा घाट इलाके में बहने वाली पवित्र शारदा नदी के किनारे कूड़ा डंपिंग जोन बना रखा है। यहां पूरे नगर का कूड़ा नियमित रूप से डाला जाता है। कूड़े के ऊंचे ढेर, उनमें लगी आग, उससे उठता धुआं और चारों ओर फैली दुर्गंध लगातार प्रदूषण बढ़ा रही है।

सीएम धामी के ड्रीम प्रोजेक्ट—शारदा कॉरिडोर—का उड़ रहा मज़ाक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जहां करोड़ों की लागत से शारदा घाट सौंदर्यीकरण सहित धार्मिक नगरी टनकपुर के विकास पर काम कर रहे हैं, वहीं नगर पालिका प्रशासन शारदा नदी के किनारे कूड़ा डालकर उनकी महत्वाकांक्षी शारदा कॉरिडोर योजना को धक्का देता दिख रहा है।
कूड़े के ढेर से लगी आग और दुर्गंध के कारण पूर्णागिरि यात्रियों के पार्किंग स्थल में आने वाले हजारों तीर्थयात्री परेशान रहते हैं। इस डंपिंग स्थल के ठीक पीछे आबादी और उप जिला चिकित्सालय भी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

एनजीटी के नियमों की अनदेखी—स्थानीयों में नाराज़गी

एनजीटी के नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, लेकिन नगर पालिका टनकपुर इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। स्थानीय लोग और पूर्णागिरि के यात्री कूड़ा स्थल को आबादी से दूर शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं।

गोवंशीय पशुओं की जान जोखिम में

शारदा नदी किनारे बने इस डंपिंग स्थल को न तो कवर किया गया है और न ही कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की कोई व्यवस्था है। कूड़े के ऊंचे ढेरों में आग लगी रहती है, जिससे उठता जहरीला धुआं स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन रहा है।
कूड़े के ढेर पर बड़ी संख्या में गोवंशीय पशु दिखाई देते हैं, जो पन्नी और अन्य कचरा खाकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

प्रभारी अधिशासी अधिकारी की प्रतिक्रिया

जब इस संबंध में नगर पालिका टनकपुर के प्रभारी अधिशासी अधिकारी दीपक बुडलाकोटी से बात की गई तो उन्होंने कहा—
“शासन से इस कार्य के लिए बजट जारी होने का इंतजार है। जैसे ही पैसा जारी होगा, कूड़े का निस्तारण कराया जाएगा।”
— दीपक बुडलाकोटी, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका टनकपुर

उन्होंने यह भी माना कि शारदा नदी किनारे से कूड़ा स्थल हटाने की फिलहाल नगर पालिका की कोई योजना नहीं है।

बड़ा सवा

जब सीएम धामी स्वयं अपने गृह जिले चंपावत को मॉडल जिला बनाना चाहते हैं, ऐसे में टनकपुर नगर पालिका द्वारा शारदा नदी किनारे कूड़ा फेंकने जैसी लापरवाही के बीच आखिर शहर को स्वच्छ, सुंदर और आदर्श कैसे बनाया जा सकेगा?

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