हरिद्वार: भारतभूमि पर मानवता, परमार्थ और ज्ञान के प्रतीक के रूप में आज एक दिव्य प्रकल्प, विश्व सनातन महापीठ, का भूमि पूजन समारोह संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य और प्रेरक उद्बोधन उपस्थित लोगों के लिए विशेष ऊर्जा का स्रोत बने।
महापीठ का ध्येय वाक्य “एक विश्व, एक धर्म, एक ध्वज, एक ग्रन्थ, एक विधान” वैश्विक आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। इसके संस्थापक और अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री बाबा हठयोगी जी महाराज ने बताया कि यह महाप्रकल्प लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। यह केवल भव्य स्थापत्य नहीं, बल्कि करुणा, तप, विद्वत्ता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र होगा।
इस महापीठ में वेद, उपनिषद्, गीता और धर्मशास्त्रों का गहन अध्ययन होगा। साथ ही शस्त्र प्रशिक्षण, योग, आयुर्वेद, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और सनातन जीवन पद्धति के लिए वैश्विक केन्द्र स्थापित होंगे। सनातन संसद भवनसंतों, महापुरुषों और धर्माचार्यों का वैश्विक मंच बनेगा, जहाँ से धर्मोदेश, विश्वशांति और मानवकल्याण के मार्गदर्शक सिद्धांत प्रसारित होंगे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत की संस्कृति विश्वबंधुत्व का महान दर्शन है और सनातन वह लौ है जो कभी बुझती नहीं। विश्व तनाव और संघर्ष से जूझ रहा है, ऐसे समय में भारत को आगे बढ़कर आध्यात्मिक नेतृत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि विश्व सनातन महापीठ आने वाले समय में भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक राजधानी और वैश्विक नेतृत्व का केंद्र बनेगा।
भूमि पूजन में देशभर से संत, भक्त और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रमुख उपस्थितियों में बाबा हठयोगी जी महाराज, तीर्थाचार्य रामविशाल दास जी, महंत ओमदास जी, स्वामी ब्रह्मेशान्द आचार्य, और अन्य वरिष्ठ संत शामिल थे। कार्यक्रम वैदिक मंत्र, अनुष्ठान और दिव्य संगीत के साथ सम्पन्न हुआ।
यह भूमि पूजन केवल एक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं, बल्कि नए युग की आध्यात्मिक जागृति और सनातन धर्म के वैश्विक नेतृत्व की दिशा में निर्णायक कदम है।






.jpeg)








Copyright © 2026 News Bank. Designed & Developed by Digital Clik