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  • Written By: Admin
  • Published: December 13, 2025 01:22 PM IST
उत्तराखंड

जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से बुजुर्ग विधवा व असहाय पुत्री को मिला न्याय

बैंक की मनमानी पर जिला प्रशासन सख्त

देहरादून। बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा बुजुर्ग विधवा कमलेश और उनकी नॉमिनी पुत्री प्रीति सिंह को बीमित ऋण के बावजूद परेशान किए जाने के मामले में जिलाधिकारी सविन बंसल के हस्तक्षेप से पीड़ित परिवार को न्याय मिला।

त्वरित कार्रवाई: 3.30 लाख की आरसी रद्द

जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैंक की ₹3.30 लाख की रिकवरी कार्रवाई (आरसी) रद्द कर दी। इसके बाद बैंक ने 24 घंटे के भीतर नॉमिनी प्रीति सिंह के नाम ₹3.30 लाख का चेक जारी किया।

पीड़िता का मामला

पीड़िता ने बताया कि उनके पिता स्व. राजेन्द्र पाल ने 2023 में बैंक से ₹13 लाख का ऋण लिया था और बैंक के निर्देश पर इसे बीमा कराया गया। उनके पिता ने 2023 से अप्रैल 2025 तक नियमित किस्तें जमा कीं। अप्रैल 2025 में उनके पिता का आकस्मिक निधन हो गया।

जून 2025 में बीमा कंपनी ने ऋण क्लेम की राशि बैंक में जमा कर दी, बावजूद इसके बैंक ने ₹3,30,980 अतिरिक्त जमा कराने का दबाव बनाया और संपत्ति जब्त करने की धमकी दी।

जिलाधिकारी का हस्तक्षेप

शिकायत के गंभीर होने पर जिलाधिकारी ने उप-जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच में स्पष्ट हुआ कि बीमा राशि प्राप्त होने के बाद भी बैंक द्वारा अनुचित मांग की जा रही थी।

जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद बैंक ने 24 घंटे के भीतर चेक जारी कर पीड़िता को सौंपा।

जिलाधिकारी का संदेश

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि किसी भी नागरिक के साथ वित्तीय संस्थानों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनपद प्रशासन भविष्य में ऐसे मामलों में कड़े कदम उठाएगा और प्रत्येक शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

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