उखीमठ/रुद्रप्रयाग, 18 नवंबर।
द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट मंगलवार सुबह 8 बजे विधिवत रूप से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी और स्वाति नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में सम्पन्न हुई इस प्रक्रिया में 350 से अधिक श्रद्धालु, बीकेटीसी अधिकारी, वन विभाग और प्रशासनिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
ब्रह्ममुहूर्त में पूजा-अर्चना के बाद पुजारियों ने स्वयंभू शिवलिंग को परंपरानुसार समाधि रूप देकर स्थानीय पुष्पों एवं राख से आच्छादित किया। इसके बाद चल विग्रह डोली ढोल-दमाऊं के साथ पहले पड़ाव गौंडार के लिए रवाना हुई।
बीकेटीसी के अनुसार इस वर्ष 22,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने मदमहेश्वर के दर्शन किए।
चल विग्रह डोली –
19 नवंबर को रांसी स्थित राकेश्वरी मंदिर,
20 नवंबर को गिरिया,
और 21 नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुँचेगी।
डोली के स्वागत हेतु उखीमठ में व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं।






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