यूकॉस्ट द्वारा आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन–2025 में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हरिद्वार, पंतनगर और औली में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान रडार स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने इसे उत्तराखंड में जल-मौसम संबंधी खतरों से निपटने के लिए एक जरूरी पहल बताया।
डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य में फ्लैश फ्लड और बादल फटने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। ग्लेशियर पिघलना, फ्रेजाइल माउंटेन इकोसिस्टम, डी-फॉरेस्टेशन और मानवजनित गतिविधियां इसके मुख्य कारण हैं। उन्होंने बताया कि पहले ही सुरकंडा, मुक्तेश्वर और लैंसडौन में रडार लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि एनडीएमए की योजना के तहत उत्तराखंड के जंगलों को आग से बचाने की कार्रवाई जल्द लागू होगी। सम्मेलन में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला, सचिव आईटी नितेश झा, और यूकॉस्ट महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत समेत कई विशेषज्ञ उपस्थित थे।
केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादवने वीडियो संदेश में कहा कि सिलक्यारा विजय अभियान आपदा प्रबंधन में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने 25 वर्षों में उत्तराखंड की राष्ट्रीय और वैश्विक प्रगतिशील पहचान को भी सराहा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की प्रगति को नई दिशा दी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय केवल पर्वत शृंखला नहीं बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन स्रोत है। हिमालय की नदियां, ग्लेशियर और जैव विविधता पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और क्षेत्र विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। पीएम मोदी के नेतृत्व में लागू 4P मंत्र—Predict, Prevent, Prepare, Protect और 10 सूत्रीय एजेंडा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए क्रांतिकारी साबित हो रहा है।






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