देश और उत्तराखंड में इस समय गैस की किल्लत एक बड़ी खबर बन चुकी है। यह संकट ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण उत्पन्न हुआ है, जिससे भारत समेत कई देशों में गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने अस्पताल, छात्रावास और स्कूलों को छोड़कर सभी कमर्शियल गैस कनेक्शन धारकों को फिलहाल गैस की सप्लाई बंद करने का निर्देश दिया है। इससे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, जैसे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
उत्तराखंड के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी गैस की कमी का असर दिख रहा है। आर्थिक तंगी के चलते कई व्यवसायी अपनी दुकानों को बंद करने तक की नौबत आने की चेतावनी दे रहे हैं। दून वैली महानगर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष और राष्ट्रीय व्यापारिक कल्याण बोर्ड उत्तराखंड के सदस्य पंकज मैंसोन ने सभी होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों से अपील की है कि वे फिलहाल जितना संभव हो कम से कम गैस सिलेंडर का उपयोग करें और वैकल्पिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें।
उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की समस्याओं को देखते हुए जलाऊ लकड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा:
“इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, लेकिन आने वाले समय में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। फिलहाल भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह तैयार है और जलाऊ लकड़ी को कमर्शियल उपयोग में लाने की व्यवस्था कर रहा है। वन निगम के माध्यम से लकड़ी की सप्लाई के निर्देश दे दिए गए हैं।”
हालांकि, कुछ खाद्य प्रतिष्ठान इस बात पर जोर दे रहे हैं कि लकड़ी का उपयोग उनके लिए उपयुक्त नहीं है।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए यह समय कठिन है। सिलेंडर की कमी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इस संकट के दौरान सरकार और वन विभाग की योजनाओं पर सभी की नजरें हैं कि कैसे यह वैकल्पिक समाधान प्रभावी रूप से लागू होगा।






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