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  • Written By: Admin
  • Published: November 11, 2025 04:32 PM IST
उत्तराखंड

उत्तराखंड ब्रेकिंग: ONGC चौक हादसे को पूरे हुए एक साल — 6 दोस्तों की दर्दनाक मौत का मामला अब तक अधूरा, चार्जशीट नहीं हुई पूरी

ONGC Chowk हादसा: देहरादून में आज 11 नवंबर 2025 को 11 नवंबर 2024 के ONGC चौक हादसे को एक साल पूरा हो गया। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी, जो तेज रफ्तार और एक कंटेनर से टकराने के कारण हुई। हादसे के बाद लोगों ने जानना चाहा कि इसकी असल वजह क्या थी।

बता दें, एक साल बीत जाने के बाद भी पुलिस ने चार्जशीट दाखिल नहीं की है

11 नवंबर 2024 की रात 1:30 बजे, ONGC चौक पर तेज रफ्तार इनोवा कार सड़क में खड़े कंटेनर से टकरा गई। हादसा इतना भयानक था कि देखने वाले की रूह कांप गई। उस रात कार में 7 दोस्त घर से निकले थे, लेकिन टक्कर इतनी भीषण थी कि 6 युवाओं की मौके पर मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि 150 मीटर के दायरे में मृतकों के अंग बिखरे हुए थे।

हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल थे:

  • गुनीत (19 वर्ष)

  • कुणाल कुकरेजा (23 वर्ष)

  • ऋषभ जैन (24 वर्ष)

  • नव्या गोयल (23 वर्ष)

  • अतुल अग्रवाल (24 वर्ष)

  • कामाक्षी सिंघल (20 वर्ष)

सातवें व्यक्ति, सिद्धेश अग्रवाल, गंभीर रूप से घायल होने के बाद महीनों अस्पताल में रहे और घर लौटने के बाद पूरी तरह बोलने या बताने की स्थिति में नहीं थे।

हादसे में जिस कंटेनर से टक्कर हुई, वह गाजियाबाद की एक कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड था, लेकिन उसके दस्तावेज 2013 में ही एक्सपायर हो चुके थे। कंटेनर का फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस और रजिस्ट्रेशन तीनों ही एक्सपायर थे। फिर भी यह कंटेनर गाजियाबाद से देहरादून तक राज्य की सीमाएं पार कर आया। वर्तमान में यह कंटेनर सर्किट हाउस चौकी पर खड़ा है, और कार का पिचका हुआ हिस्सा उससे चिपका हुआ है।

कंटेनर का इतिहास विवादों से भरा रहा। पहले यह गुरुग्राम की VRC लॉजिस्टिक के नाम था, फिर इसे नरेश गौतम को बेचा गया और उन्होंने नामांतरण नहीं कराया। इसके बाद इसे मेरठ के अभिषेक चौधरी को बेचा गया, जिन्होंने भी नामांतरण नहीं कराया। हादसे की रात यह कंटेनर एक होरिजॉन्टल ड्रिलिंग मशीन लेकर कौलागढ़ जा रहा था, इसी दौरान तेज रफ्तार इनोवा कार से टकरा गया।

हादसे के 12 दिन बाद पुलिस ने कंटेनर चालक रामकुमार को गिरफ्तार किया, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कंटेनर मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और अदालत में चार्जशीट भी दाखिल नहीं हुई। समय पर चार्जशीट दाखिल न होने से सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ जाती है।

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