ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: November 08, 2025 01:51 PM IST
उत्तर प्रदेश

सपनों का बोझ न सह पाया बेटा! नीट अभ्यर्थी ने छोड़ा भावुक नोट, फांसी लगाकर दी जान

कानपुर। यूपी के कानपुर से एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय छात्र मो. आन ने शुक्रवार को अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
मरने से पहले छोड़े गए सुसाइड नोट में उसने लिखा —

“अम्मी-अब्बू, माफ करना… मैं बहुत तनाव में हूं। आपके सपने पूरे नहीं कर पाऊंगा। मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।”

📍 चार दिन पहले ही हॉस्टल में शिफ्ट हुआ था छात्र

मूल रूप से रामपुर के भंवरका गांव निवासी मो. नजीर का बेटा मो. आन मेडिकल की तैयारी के लिए कानपुर के हितकारी नगर (रावतपुर थाना क्षेत्र) स्थित एक हॉस्टल में रह रहा था।
जानकारी के अनुसार, वह सिर्फ चार दिन पहले ही हॉस्टल में रहने आया था।

🕌 जुमे की नमाज के लिए नहीं गया, लौटकर दिखा भयावह दृश्य

शुक्रवार दोपहर उसके रूम पार्टनर इमदाद हसन ने उसे जुमे की नमाज के लिए बुलाया, लेकिन उसने जाने से मना कर दिया।
जब इमदाद नमाज पढ़कर लौटा और कमरे का दरवाजा खटखटाया, तो कोई जवाब नहीं मिला। बार-बार आवाज देने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो उसने पुलिस को सूचना दी।

🚨 दरवाजा तोड़ा गया तो फंदे से लटकता मिला शव

सूचना पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक टीम ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर का नजारा बेहद दर्दनाक था —
मो. आन का शव पंखे से फंदे के सहारे लटका हुआ मिला। पास में रखा सुसाइड नोट उसकी मानसिक स्थिति की गवाही दे रहा था।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचित कर दिया गया है।

💔 परिवार में मचा कोहराम

बेटे की मौत की खबर सुनते ही रामपुर स्थित घर में मातम छा गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है।
थाना प्रभारी मनोज मिश्रा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

🧠 तनाव में झुलसते युवा — बढ़ती चिंता का विषय

यह घटना फिर एक बार उस गंभीर सवाल को सामने लाती है —
क्यों मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा इतनी मानसिक दबाव में आ जाते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, अब समय आ गया है कि मानसिक स्वास्थ्य, माता-पिता के साथ संवाद, और काउंसलिंग सुविधाओं को शिक्षा व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।

🕯️ “अम्मी-अब्बू, माफ करना…” — यह सिर्फ एक बेटे की आखिरी पंक्ति नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जो सपनों का बोझ इतना बढ़ा देती है कि ज़िंदगी हार मान लेती है।

ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×